राजधानी में इन दिनों डॉक्टर और मरीज दोनों सड़कों पर हैं। मरीज इलाज न मिलने की वजह से अस्पतालों के बाहर धक्के खा रहे हैं। वहीं डॉक्टर अस्पतालों से बाहर कैंडल मार्च निकाल रहे हैं। इस सबके बीच सरकार खामोश है। पिछले एक सप्ताह से सरकार और डॉक्टरों के बीच कोई भी बातचीत न होने का दावा रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन ने किया है।
दरअसल नीट पीजी की काउंसलिंग में देरी की वजह से राजधानी के छह बड़े अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं। बीते आठ दिन से डॉक्टर काउंसलिंग की डेट जल्द से जल्द कराने की मांग करते हुए ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाओं तक से हाथ खींच चुके हैं। वहीं मरीजों की हालत नाजुक होते जा रही है। हड़ताल का असर राजधानी अस्पतालों पर भी पड़ रहा है।
एम्स में हड़ताल नहीं है लेकिन यहां इमरजेंसी में कोई बेड खाली भी नहीं है। सफदरजंग में 500 से ज्यादा बेड खाली हैं लेकिन यहां इलाज करने वाले डॉक्टर हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से अब तक करीब छह हजार से भी ज्यादा ऑपरेशन टाले जा चुके हैं।
निकाला कैंडल मार्च
रीब एक हजार रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार को निर्माण भवन पहुंचकर प्रदर्शन किया। यहां कई राज्यों से आए डॉक्टर पहुंचे थे। शाम को डॉक्टर कैंडल मार्च के लिए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एकत्रित हुए और नीट पीजी कॉउंसलिंग जल्द कराने की मांग दोहराई। कैंडल मार्च डॉक्टरों ने कनॉट प्लेस तक निकाला था
मंत्रालय के बाहर विरोध जारी
अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन पिछले चार से निर्माण भवन स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को मध्यप्रदेश और राजस्थान से आए डॉक्टरों के संगठनों के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया।
यहां सबसे ज्यादा असर
दिल्ली एम्स, हिंदूराव और संजय गांधी जैसे कुछ अस्पतालों में हड़ताल नहीं है लेकिन सफदरजंग अस्पताल, लोकनायक, दंत चिकित्सालय, जीबी पंत, जीटीबी, इहबास के डॉक्टर इन दिनों हड़ताल पर हैं।