इसके अलावा एजी ने डीएमआरसी द्वारा दायर एक अतिरिक्त हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि अगर कंपनी कोई ऋण लेने का प्रयास करती है तो वह वित्तीय जाल में पड़ सकती है। उन्होंने कहा पहले भी मेट्रो अन्य विकल्प तलाश रही थी और अपनी चिंताओं को दो इक्विटी भागीदारों को लिख चुकी है।एजी ने पुरस्कार के संदर्भ में डीएएमईपीएल को किए जाने वाले भुगतान के संबंध में तौर-तरीकों को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए दो सप्ताह की अवधि मांगी। अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी।
हलफनामे में कहा गया है डीएमआरसी ने डिक्री धारक को लगभग 2600 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दे दी है और अपने शेयरधारकों से धन की उम्मीद कर रही है ताकि मध्यस्थ पुरस्कार की शेष राडशि के भुगतान को पूरा किया जा सके।
6 सितंबर को अदालत ने डीएमआरसी को चार सप्ताह की अवधि के भीतर डीएएमईपीएल को शेष भुगतान करने का निर्देश दिया था जिसमें विफल रहने पर इसके प्रबंध निदेशक को तलब करने को कहा था। एजी सोमवार को पहली बार इस मामले में पेश हुए।
अदालत डीएएमईपीएल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें 11 मई, 2017 को मध्यस्थता पुरस्कार को लागू करने की मांग की गई है। 2008 में डीएमआरसी ने लाइन के डिजाइन, स्थापना, कमीशन, संचालन और रखरखाव से संबंधित डीएएमईपीएल के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि कुछ विवादों के कारण, मामला 2012 में मध्यस्थता में चला गया। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने डीएएमईपीएल के पक्ष में दिए गए पुरस्कार को बरकरार रखा था।