दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में शैक्षणिक सत्र 2022-23 में पहले सेमेस्टर के छात्र चार वर्षीय स्नातक प्रोग्राम का सिलेबस पढ़ेंगे। डीयू की कार्यकारी परिषद की बैठक में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के सिलेबस पर अंतिम मुहर लग गई है।
बृहस्पतिवार को कार्यकारी परिषद की बैठक में सिलेबस को पास कराने के लिए रखा गया था। देर रात तक चली बैठक में सदस्यों की आपत्ति के बाद इसे पास कर दिया गया। अगस्त की शुरुआत में सिलेबस को डीयू की अकादमिक काउंसिल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे कार्यकारी परिषद में लाया गया था। इसके साथ ही 43 पाठ्यक्रमों के लिए कौशल वृद्धि पाठ्यक्रम को भी पास कर दिया गया। इसे अंडर ग्रेजुएट करकिुलम फ्रेमवर्क के तहत शैक्षणिक सत्र 2022-23 में लागू किया जाना है।
डीयू कार्यकारी परिषद सदस्य डॉ. राजपाल पंवार ने बताया कि बैठक में सिलेबस पास करने को लेकर आपत्ति जताई गई। आपत्ति इस बात को लेकर है कि इसे जल्दबाजी में तैयार किया गया है। उदाहरण स्वरूप उन्होंने बताया कि कहा जा रहा है कि स्किल इनहासमेंट कोर्स के तहत एक रचनात्मक लेखन का एक कोर्स लाया जा रहा है। इसके लिए कहा जा रहा है कि छात्र तीन माह में किताब लिखने के योग्य हो जाएगा। ऐसा कैसे संभव हो सकता है।
डीयू ने बनाई प्राइवेट कंपनी, एक करोड़ रुपये स्टूडेंट फंड से लेंगे
बैठक में डीयू की ओर से बनाई गई प्राइवेट कंपनी को लेकर भी चर्चा की गई, इसे पास भी कर दिया गया। यह कंपनी स्टूडेंट फंड से पैसे लेगी। सदस्यों ने यह कहकर आपत्ति जताई कि इससे छात्रों की फीस बढ़ जाएगी। डीयू को यह सोचना चाहिए कि यहां 60 फीसदी छात्र एससी. एसटी, ओबीसी और ईडब्लयूएस श्रेणी के हैं। इस कंपनी के बनने से छात्रों पर बोझ बढ़ेगा।
अंकों के आधार पर प्रवेश की चर्चा
बैठक में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के पहले सेमेस्टर के पाठ्यक्रम और केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के अंकों के आधार पर प्रवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। अब दूसरे और तीसरे और चौथे वर्ष के सिलेबस जैेसे-जैसे तैयार होंगे वैसे वैसे उन्हें पास किया जाएगा। शून्य काल में दाखिले को लेकर चर्चा की गई। हमने आपत्ति जताई कि क्यों इस तरह से एनटीए जैसी संस्था को टेस्ट कराने की जिम्मेदारी दी गई है। एनटीए की ओर से कराए जा रहे सीयूईटी में लगातार दिक्कतें आ रही हैं। वहीं डीयू में दाखिले में देरी के कारण प्राइवेट कॉलेजों की ओर रूख कर रहे हैं।