दिल्ली विश्वविद्यालय ने सत्र 2022-23 से चार वर्षीय प्रोग्राम (एफवाईयूपी) लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिया है। सोमवार को शैक्षणिक विषयों के लिए बनी स्टैडिंग कमेटी की बैठक में चार वर्षीय प्रोग्राम के ढांचे को हरी झंडी से दी गई है। बैठक में कमेटी के सदस्यों के हंगामे के कारण मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स पास नहीं हुए और उन्हें स्थगित कर दिया गया। इसको लेकर कुल 36 सदस्यों में से 3 सदस्यों ने आपति भी दर्ज कराई।
सोमवार को स्टैडिंग कमेटी की बैठक दोपहर करीब 2.30 बजे शुरु हुई बैठक करीब नौ बजे समाप्त हुई। बैठक की शुरुआत के साथ ही कमेटी के सदस्यों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वन (एनईपी) को लेकर हंगामा किया। हंगामें के बावजूद एनईपी को पास कर लिया गया। एनईपी के तहत ही चार वर्षीय प्रोग्राम को लाया जा रहा है। मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स को लेकर भी हंगामा हुआ।
कमेटी के सदस्यों के मुताबिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरु होने वाले चार साल के पाठ्यक्रम को लेकर भी सदस्यों की ओर से विरोध जताया गया। इस दौरान कपिला, डॉ. सुधांशु कुमार, राजेश कुमार, आशा, सुनील कुमार, सुरेंद्र कुमार व निधि कपूर की ओर से आपति दर्ज कराई गई। अब पास किए गए ढांचे को मंगलवार को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पास कराने के लिए रखा जाएगा। डूटा कोषाष्धक्ष आभा देव हबीब का कहना है कि डीयू में वर्ष 2013 में भी एफवाईयूपी लाया गया था। जिसे छात्रों ने अपने ऊपर एक साल अतिरिक्त बोझ समझते हुए खारिज कर दिया था। एफवाईयूपी के लागू होने से कॉलेजों पर भी संसाधनों का बोझ बढ़ेगा। एफवाईयूपी के विरोध में डूटा ने वीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया है।