हाल ही में दिल्ली पुलिस में खोले गए 15 साइबर थानों में दस लाख रुपये तक की जालसाजी के मामलों की एफआईआर हो सकेगी। दस लाख व उससे ज्यादा की रकम की ठगी के मामलों की जांच स्पेशल सेल की आईएफएसओ करेगी। इसके अलावा साइबर थानों में डिस्ट्रिक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल (एसएमएमसी) बनाया गया है।
इस सेल का इंचार्ज एक सब-इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी होगा। इसके नीचे दो सहायक पुलिसकर्मी होंगे। ये जिले में ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब आदि पर नजर रखेंगे। सोशल मीडिया पर अगर कुछ भी गलत दिखाई देता है तो उसकी जानकारी तुरंत थानाध्यक्ष को देंगे। संवेदनशील मामलों में तुरंत कदम उठाया जाएगा।
दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना के आदेश पर दिल्ली पुलिस में 15 नए साइबर थाने बनाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के 15 जिलों में हर जिले में एक साइबर थाना बनाया गया है। इन थानों में इंटरनेट-बैकिंग संबंधित धोखाधड़ी, यूपीआई धोखाधड़ी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, ई-मेल व मैसेज धोखाधड़ी, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी आदि मामलों की जांच होगी। आदेश में कहा गया है कि अगर जालसाजी की रकम दो करोड़ रुपये से ज्यादा की है तो उसकी जांच आईएफएसओ या फिर ईओडब्ल्यू में होगी।
116 पुलिसकर्मी तैनात होंगे
साइबर थाने का एक थानाध्यक्ष होगा। इसके अलावा थाने में 115 अन्य पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। साइबर थानों में 21 तरह की ड्यूटी होंगी। इनमें जांच टीम, रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स पत्राचार ब्रांच, डाक ड्यूटी, जागरूकता एवं ट्रेनिंग सेल, आईपीडीआर सेल, फॉरेंसिक टीम, शिकायत ब्रांच, मालखाना, लीगल सेल, एसएमएमसी आदि प्रमुख होंगी।
लोगों को जागरूक भी करेंगे
साइबर थाने न केवल साइबर ठगी को लेकर एफआईआर व जांच करेंगे, बल्कि लोगों को साइबर अपराध के बारे में भी जागरूक करेंगे। इसके लिए सभी साइबर थानों में एक-एक जागरूकता एवं ट्रेनिंग सेल बनाया गया है। लोगों को जागरूक करना साइबर थाने की प्रमुख ड्यूटी होगी। साइबर अपराध के बारे में अच्छी जानकारी रखने वाला सब-इंस्पेक्टर दो सहयोगियों समेत इस सेल का प्रभारी होगा।