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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव : 37 फीसदी हुआ मतदान, नतीजा 25 को 

Mon, 23 Aug 2021 05:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • 46 वार्ड के लिए चुनाव परिणाम 25 अगस्त को आएगा
  • पिछले चुनाव में वोट प्रतिशत 45.61 था
  • सबसे अधिक मतदान पंजाबी बाग वार्ड में 54.10 प्रतिशत 
  • सबसे कम मदान श्याम नगर वार्ड में 25.18 प्रतिशत 
  • कुल 3.42 लाख सिख मतदाताओं में महज 1,27,472 मतदान केंद्र तक पहुंचे 
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मतदान में मदद... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। चुनाव का परिणाम 25 अगस्त को आएगा। सुबह 8 बजे मतदान शुरू हुआ, रक्षाबंधन की वजह से दोपहर तक मतदान प्रतिशत काफी कम रहा। पहले एक घंटे में मतदाताओं की संख्या भी बूथ पर काफी कम दिखाई दी, लेकिन समय बीतने के साथ ही इनकी संख्या बढ़ी बावजूद शाम तक कुल मत प्रतिशत महज 37.27 प्रतिशत ही रहा। जबकि पिछले बार 2017 के चुनाव में मत प्रतिशत 45.61 प्रतिशत था। 

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गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव में इस साल सिख मतदाताओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा नहीं लिया। कुल 3.42 लाख सिख मतदाताओं में महज 1 लाख 27 हजार 472 मतदाताओं ने ही मतदान केंद्र तक पहुंचे और अपना मत दिया। 

चुनाव में सबसे अधिक मत प्रतिशत पंजाबी बाग वार्ड में हुआ। यहां कुल मत 54.10 प्रतिशत पड़ा। जबकि पिछले चुनाव में मतों का प्रतिशत 57.56 प्रतिशत था। इस वार्ड से गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा मैदान में थे तो दूसरी तरफ पूर्व अध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह सरना मैदान में थे। सबसे कम मतदान वाला सिख वार्ड इस बार भी श्याम नगर ही रहा। यहा महज 25.18 प्रतिशत ही मतदान हुआ। इस वार्ड में पिछले चुनाव में 28.57 प्रतिशत मत पड़े थे। पिछले चुनाव में सबसे कम मतदान संत गढ़ वार्ड में 26.14 प्रतिशत रहा था।
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गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव के लिए खासकर सिख बहुल इलाके तिलक नगर, हरि नगर, राजौरी गार्डेन, पंजाबी बाग में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इसी तरह पूर्वी दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली के कई वार्ड में मतदाताओं ने उत्साह के साथ शांतिपूर्ण मतदान किया। पश्चिमी दिल्ली इलाके में जहां बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं ने मतदन किया तो वहीं दक्षिणी दिल्ली इलाके के वार्ड में युवाओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते दिखें। पूर्वी दिल्ली के कई वार्ड में वरिष्ठ नागरिकों ने अपने प्रत्याशी के समर्थन में मतदान किया। मतदान को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती सभी बूथ पर की गई थी। 

वोटो की गिनती व परिणाम 25 अगस्त को आएगा
दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारे की गद्दी कौन संभालेगा यह मत पेटी में कैद हो गया। भाग्य का फैसला दो दिनों बाद होगा। स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों, बाला साहिब अस्पताल समेत अन्य तमाम मुद्दों को कौन करेंगे। कुल 46 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए 312 उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल पूरे 46 सीटों पर चुनाव लड़ी है तो सरना गुट ने 8 सीटों पर पंथक अकाली लहर के साथ गठबंधन किया है। जागो पार्टी 40 वार्ड में चुनाव लड़ रही है। 

पिछली बार हुई थी 45 प्रतिशत वोटिंग
पिछली बार 2017 में हुए चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने दूसरी बार कमिटी की गद्दी पर जीत हासिल की थी। एकतरफा नतीजों में 46 में से 35 सीटें अकाली दल को मिली थी। सरना गुट महज 7 वार्ड में ही सिमट गई थी। 2 सीटें एसडब्ल्यूएस को मिला था जबकि 2 सीटों पर निर्दलीय जीते थे। पिछली बार 3 लाख 82 हजार लोगों को मतदान करना था। 

सियासी महत्व भी है
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव बेशक धार्मिक है। लेकिन इसका सियासी महत्व भी है। दिल्ली प्रबंधक कमेटी का चुनाव का असर अगामी पंजाब विधानसभा चुनाव और दिल्ली एमसीडी चुनाव पर भी देखने को मिल सकता है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर दिल्ली की राजनीतिक पार्टियों की भी इस चुनाव पर नजर है और समर्थन भी मिला है। अकाली दल बादल गुट के साथ भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद अप्रत्यक्ष तौर से अकाली दल से ही टूटे जागो पार्टी के साथ रहा तो वहीं रणनीतिकार जहां जागो पार्टी की हार देख रहे थे वहां अंदरखाने सरना गुट को समर्थन देने से भी पीछे नहीं रहे।

एक नजर...

  • दिल्ली के 46 वार्डों में हुआ चुनाव।
  • 46 वार्ड के लिए 546 पोलिंग बूथ बने थे।
  • कुल 312 सिख प्रत्याशी है मैदान में। 
  • 3.42 लाख सिख मतदाता।
  • 25 अगस्त को चुनाव का परिणाम आएगा। 
  • शिरोमणि अकाली दल (बादल), शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली), जागो पार्टी, पंथक लहर है मैदान में। 
  • दलों ने अपने 180 प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि 132 प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।


गुरुद्वारा चुनाव में 55 में से 46 सदस्यों के लिए हुआ मतदान 
श्री अकाल तख्त साहिब, तख्त श्री पटना साहिब, तख्त श्री केशगढ़ साहिब व तख्त श्री हुजूर साहिब के जत्थेदार भी डीएसजीएमसी के सदस्य होंगे। साथ ही दिल्ली के सिंह सभाओं के प्रधानों में से दो को प्रबंधक कमेटी का सदस्य बनाया जाता है। इनका चयन लॉटरी के जरिए किया जाता है। 

सिरसा ने सभी सिख वोटर्स का आभार प्रकट किया
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिन्दर सिंह सिरसा व महासचिव हरमीत सिंह कालका ने दिल्ली के सभी सिख वोटर्स खासकर महिलाओं का आभार प्रकट किया है। कहा कित्योहार के बावजूद संगत में खासा उत्साह देखा गया। संगत ने 2 वर्षों के कार्यकाल को देखा और परखा है जिसके दम पर हमें पूर्ण विश्वास है कि संगत एक बार फिर से हमें सेवा का मौका अवश्य देगी। 
उन्होंने कहा चुनावों के परिणाम आते ही हम सबसे पहले बाला साहिब अस्पताल संगत के सर्पुद करेंगे जिसमें बेहतर इलाज मरीजों का हो सकेगा इसके साथ ही अन्य जो वायदे हमने संगत के साथ किये हैं उसे पूरा किया जायेगा। विरोधियों दलों के लड़ने झगड़ने के मंसूबो को नाकामयाब करते हुए हमारे सभी उम्मीदवारों ने शान्तिपूर्वक चुनावों में भाग लिया। चुनावों के दौरान पुख्ता प्रबंध नहीं करवाने के लिए प्रशासन और गुरुद्वारा चुनाव से नाराजगी जताई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने वोट किया:सरना 
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना व सरदार हरविंदर सिंह सरना ने कहा कि बादलों के खिलाफ सुनामी नजर आ रही है। निर्णायक दिन है। पूरे उत्साह के साथ मतदान लोगों ने किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने वोट किया है। बादल गुट पूरे तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है। चुनाव प्रबंधन बेहतर तरीके से प्रशासन ने किया था। किसी तरह की हिंसा नहीं हुई और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ है।  मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर नजर आई।

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आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने मतदान से दूर किया

दिल्ली की सिख सियासत में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने मतदाताओं को मतदान केंद्र से दूर रखा। पूरे साल सिख राजनीति में एक पार्टी दूसरे पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही। यहां तक कि कोविड काल में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो किसानों के समर्थन देने पर भी खूब राजनीति देखने को मिली। वहीं जम्मू-कश्मीर में जबरन धर्म परिवर्तन के नाम पर भी सियासत होती रही। राजनीतिक पार्टी एक दूसरे को अदालत तक खींचने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही थी। रणनीतिकारों की माने तो प्रबंधक कमेटी से दिल्ली के सिख युवाओं में भी मोहभंग देखने को मिल रहा था।

सिख राजनीति के जानकार बताते है कि शिरोमणी अकाली दल बादल गुट के नेता भी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे। यहां तक कि पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके पर जब भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ा गया तो वह पार्टी छोड़ नया जागो पार्टी बना कर चुनाव में उतर गए और बादल गुट ही नहीं प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा पर भी जमकर भ्रष्टाचार का आरोप मढने लगे। दूसरी तरफ सत्ता से दूर रहे परमजीत सिंह सरना भी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर लगातार भ्रष्टाचार का आरोप मढ़ते रहे। कोविड केयर सेंटर व गुरुद्वारा बाला साहिब अस्पताल को लेकर भी जमकर राजनीति हुई। 

धार्मिक नेताओं की माने तो गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सियासी पार्टी नहीं है। यह एक धार्मिक संगठन है तो गुरु की सेवा के लिए है। बावजूद आए दिन अकाल तख्त तक शिकायत, अदालत तक आपसी लड़ाई पहुंचना। सड़क पर राजनीति की वजह से सिखों ने चुनाव से अपने को दूर कर लिया। युवा और महिलाओं ने खासकर महत्वपूर्ण भूमिका में नहीं दिखें भले ही जागों पार्टी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टी भ्रष्टाचार का आरोप तो लगाती रही, लेकिन सिख स्कूल, कॉलेज, अस्पताल में कर्मचारियों के वेतन को लेकर ध्यान नहीं दिया। कई बार गुहार लगाने के बाद भी वेतन नहीं मिला। जबकि गुरु के गोलक में कोई कमी नहीं रही। दूसरी तरफ कोविड काल में ऑक्सीजन लंगर तो लगा, कोविड केयर सेंटर भी बना, लेकिन जब संक्रमण पीक पर था तो लोगों को उम्मीद के अनुसार मदद का अभाव भी रहा।

चार वार्ड में ही महज 50 प्रतिशत से अधिक मतदान
मतदाताओं की चुनाव में रूचि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुल 46 वार्ड में हुए चुनाव में महज चार वार्ड में ही 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हो पाया। पंजाबी बाग वार्ड के अलावा 50 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले वार्ड में त्रि-नगर रहा। यहां 51.21 प्रतिशत मतदान हुआ। इसी तरह लाजपतनगर में 50.69  प्रतिशत मतदान हुआ। हरिनगर में 50.46 प्रतिशत मतदान हुआ। 
इतना ही नहीं 45 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले वार्ड की बात करें तो महज छह वार्ड में ही उम्मीदवारों को इससे अधिक मत प्राप्ता हुआ। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक वार्ड में तो 35 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ।

कम मतदान से बढ़ी उलझन
कम मतदान होने की वजह से कोई भी पार्टी अपनी पक्की जीत मानकर नहीं चल रहा है। सिख सियासत में इस बात को लेकर चिंता है कि इस तरह के वोट पैटर्न को क्या माना जाए। मत प्रतिशत ज्यादा रहता तो सत्ता के खिलाफ लहर माना जाता है, लेकिन इतना कम प्रतिशत पर भी जानकार यह कहते है कि वर्तमान सत्ता से मोहभंग का संकेत है। पहली बार तीन मजबूत पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने से भी चुनावी गुणा-भाग में परेशानी हो रही है। कोई पार्टी मजबूत दावेदारी नहीं पेश कर पा रहा। कुछ जानकारों का कहना है कि इस बार तीनों पार्टी से सदस्य चुने जा सकते है। एकतरफा किसी की लहर वोट पैटर्न को देखने से नहीं मिल रही है।
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