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दिल्ली दंगा: पुलिस की कहानी पर संदेह जताते हुए अदालत ने दो आरोपियों को दी जमानत, बोले- तथ्यों पर विश्वास करना मुश्किल

Sat, 05 Jun 2021 11:29 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को मानने से इंकार कर दिया कि आरोपी इलाके का बीसी है और उस पर हत्या, लटपाट इत्यादि आरोप के 15 मामले दर्ज हैं। अदालत ने कहा आरोपी को 10 मामलों में अदालत ने बरी कर दिया और पांच अन्य मामले दंगे के हैं।
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अदालत ने सुनाई सजा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगा से जुड़े हत्या के दो मामलों में पुलिस की कहानी पर संदेह जताते हुए दो आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि पुलिस ने दोनों मामलों में देरी से प्राथमिकी दर्ज की है। एक मामले में टिपपणी करते हुए कहा कि एक मानने में विश्वास नहीं हो रहा है कि दूसरे ग्रुप पर हमला करने वाली भीड़ ने अपने ही साथी की हत्या कर दी।

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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने थाना वैलकम मामले में आरोपी जाहिद को जमानत प्रदान की है। अदालत ने पुलिस के उस तर्क पर संदेह जताया है कि आरोपी जाहिद मृतक मुदसर के साथ खड़ा था। अदालत ने कहा कि पुलिस का केस है कि उक्त ग्रुप के लोगों ने दूरे ग्रुप के लोगों पर हमला किया। अदालत ने कहा कि मृतक व आरोपी एक ही ग्रुप के सदस्य थे और वे दूसरे ग्रुप के सदस्यों पर पत्थर बरसा रहे थे।

अदालत ने कहा कि ऐसे में इस बात पर विश्वास करना कठिन है कि इस ग्रुप के सदस्यों ने अपने ही साथी की हत्या कर दी। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि हो सकता है कि ओपन फायरिंग में मृतक को गोली लगी हो इस बात की भी संभावना है। अदालत ने कहा आरोपी के हाथ में पत्थर नजर आ रहा है न कि कोई हथियार। पुलिस को गोली चलाने वाले अज्ञात व्यक्ति का पता लगाना है। ऐसे में उनकी नजर में आरोपी जमानत का हकदार है।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को मानने से इंकार कर दिया कि आरोपी इलाके का बीसी है और उस पर हत्या, लटपाट इत्यादि आरोप के 15 मामले दर्ज हैं। अदालत ने कहा आरोपी को 10 मामलों में अदालत ने बरी कर दिया और पांच अन्य मामले दंगे के हैं।

अदालत ने कहा कि जहां तक आरोपी पर हत्या का मामला न बनने का है यह विषय ट्रायल का है। ऐसे में वे आरोपी की जमानत 20 हजार रुपये के मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार करते हैं। अदालत ने आरोपी को साक्ष्य नष्ट न करने व जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।

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दूसरा मामला थाना खजरी खास का है। अदालत ने आरोपी शाहबुद्दीन को जमानत प्रदान की है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पप्पू नामक युवक की हत्या का आरोप है। इस मामले में कांस्टेबल सहित दो अन्य चश्मदीद गवाह है।

अदालत ने कहा कि कांस्टेबल ने 25 फरवरी 20 को घटनास्थल पर होने के बावजूद 12 मार्च को अपना बयान दर्ज करवाया। वहीं एक चश्मदीद गवाह दलीप के बयान 40 दिन बाद व दूसरे गवाह दीपक के बयान 54 दिन बाद दर्ज किए गए। तीनों ने ही घटना की जानकारी देने के लिए पीसीआर को कॉल तक नहीं किया। आरोपी के खिलाफ सीसीटीवी फुटेज जैसे साक्ष्य नहीं है।

इसके अलावा पुलिस के पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी की भमिका सहआरोपियों के से अलग थी, वह मात्र भीड़ का हिस्सा था। ऐसे में वे आरोपी की जमानत 20 हजार रुपये के मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार करते हैं।
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