अदालत ने दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों की जांच में दिल्ली पुलिस के ढुलमुल रवैये के लिए कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा पुलिस जांच किए बिना ही अतिरिक्त आरोपपत्र दायर कर रही है और उसके गुण-दोष के आधार पर इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने पुलिस आयुक्त को ऐसे मामलों में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए ताकि दंगों के मामलों में उचित और शीघ्र जांच या आगे की जांच सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने इससे पहले भी एक सितंबर 2021 को दिए आदेश में दिल्ली पुलिस को दंगों के मामलों में जांच के निष्कर्ष को सुनिश्चित किए बिना एक के बाद एक पूरक आरोप पत्र दाखिल करने के लिए फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा कि पुलिस के ऐसे रवैये के चलते न्यायालय मामलों की सुनवाई को आगे बढ़ाने में असमर्थ है।
न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया था कि ऐसे मामलों में जांच का निष्कर्ष समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा कि एक महीने से भी अधिक समय से अदालत उन परीक्षणों को तेजी से आगे बढ़ा सकती है जो लंबे समय से जांच एजेंसी की निष्क्रियता के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही।
अदालत ने कहा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के तहत इस तथ्य के साथ कि आरोपी लगभग एक वर्ष से अधिक समय से जेल में सजा काट रहा है और अदालत डीसीपी और उससे अधिक रैंक तक पर्यवेक्षण अधिकारियों सहित जांच एजेंसी के ढुलमुल रवैये के कारण अन्य दंगों के मामलों के साथ-साथ गुण-दोष के आधार पर मामले को आगे बढ़ाने में असमर्थ है।
ऐसे में मामले को पुलिस आयुक्त के पास भेजना जरूरी है ताकि वर्तमान मामले में उचित और शीघ्र जांच, आगे की जांच सुनिश्चित की जा सके। साथ ही इस न्यायालय द्वारा दिए गए समय के भीतर अन्य दंगों के मामलों की जांच सुनिश्चित की जा सके।
अदालत भजनपुरा व गोकुल पुरी थाना क्षेत्र में हुए दंगों के मामले की सुनवाई कर रही है। अभियोजन पक्ष ने तर्क रखा कि दंगों के दौरान एक घर को लूटा और नष्ट किया गया। वहीं विशेष सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि बरामद सीसीटीवी फुटेज मुख्य साक्ष्य है और उसे जब्त कर एक अन्य प्राथमिकी में प्रयोगशाला भेजा गया था जिसे अनुपूरक रिपोर्ट के साथ दायर किया जाएगा।
अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को चेतावनी दी कि इस मामले में पुलिस को तीन सप्ताह की अवधि के भीतर अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल करने का समय प्रदान किया जाता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इस मामले की सुनवाई शुरू कर दी जाएगी।
अदालत ने कहा मामले में आरोपी एक वर्ष से न्यायिक हिरासत में है। इससे पहले भी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने भी पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों की जांच के तरीके के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी।