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झटका: दिल्ली दंगों में साजिश मामले में आरोपी मीरान हैदर की जमानत याचिका खारिज

Wed, 06 Apr 2022 08:15 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और साजिश के तहत हुए दंगों में काफी लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा पेश तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी की दंगों में भूमिका रही है और ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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अदालत ने मंगलवार को दिल्ली दंगों में साजिश मामले में आरोपी मीरान हैदर की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत मामला दर्ज है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और साजिश के तहत हुए दंगों में काफी लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा पेश तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी की दंगों में भूमिका रही है और ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।
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अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि दंगों की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई, संपत्तियों को नष्ट किया गया, आवश्यक सेवाओं में व्यवधान, पेट्रोल बम, लाठी, पत्थर आदि का उपयोग किया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि दंगों के दौरान कुल 53 लोग मारे गए  और सैकड़ों लोग घायल हुए। 

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि 25 मस्जिदों के करीब रणनीतिक विरोध स्थलों को चुनते हुए 2020 के धरना-प्रदर्शन की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि ये स्थल धार्मिक महत्व के स्थान थे लेकिन कथित रूप से सांप्रदायिक विरोध को वैध रूप देने के लिए जानबूझकर धर्मनिरपेक्ष नाम दिए गए थे।
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अभियोजन पक्ष ने 20 दिसंबर 2019 की बैठक का हवाला देते हुए कहा बैठक में उमर खालिद ने हर्ष मंदर, यूनाइटेड के सदस्यों के साथ भाग लिया था। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि यह बैठक विरोध के क्षेत्रों को तय करने और महिलाओं को सबसे आगे रखकर पुलिस झड़पों को कम करने की रणनीतियों को तय करने में महत्वपूर्ण थी। 
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यह भी तर्क दिया गया कि विरोध का मुद्दा सीएए या एनआरसी नहीं था बल्कि सरकार को शर्मिंदा करने और ऐसे कदम उठाने का था कि यह अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उजागर हो जाए।

वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने पूरे मामले को झूठा बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया गया है। विरोध प्रदर्शन करने का संविधान में सभी को अधिकार है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि उनका मुवक्किल दंगों की साजिश में शामिल है। 

इसके अलावा मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दायर हो चुका है। ट्रायल में देरी होगी और उनके मुवक्किल को जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। पिछले साल सितंबर में पिंजारा तोड के सदस्यों और जेएनयू के छात्रों देवांगना कलिता और नताशा नरवाल, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा के खिलाफ मुख्य आरोप पत्र दायर किया गया था। जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया उनमें पूर्व कांग्रेस पार्षद इशरत जहां भी शामिल हैं
 
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