अदालत ने मंगलवार को दिल्ली दंगों में साजिश मामले में आरोपी मीरान हैदर की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत मामला दर्ज है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और साजिश के तहत हुए दंगों में काफी लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इसके अलावा पेश तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी की दंगों में भूमिका रही है और ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि दंगों की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई, संपत्तियों को नष्ट किया गया, आवश्यक सेवाओं में व्यवधान, पेट्रोल बम, लाठी, पत्थर आदि का उपयोग किया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि दंगों के दौरान कुल 53 लोग मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हुए।
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि 25 मस्जिदों के करीब रणनीतिक विरोध स्थलों को चुनते हुए 2020 के धरना-प्रदर्शन की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि ये स्थल धार्मिक महत्व के स्थान थे लेकिन कथित रूप से सांप्रदायिक विरोध को वैध रूप देने के लिए जानबूझकर धर्मनिरपेक्ष नाम दिए गए थे।
अभियोजन पक्ष ने 20 दिसंबर 2019 की बैठक का हवाला देते हुए कहा बैठक में उमर खालिद ने हर्ष मंदर, यूनाइटेड के सदस्यों के साथ भाग लिया था। अभियोजन पक्ष ने कहा था कि यह बैठक विरोध के क्षेत्रों को तय करने और महिलाओं को सबसे आगे रखकर पुलिस झड़पों को कम करने की रणनीतियों को तय करने में महत्वपूर्ण थी।