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दिल्ली का दर्द : महंगाई से जीना हुआ दुश्वार, सीएनजी वाले भी होने लगे बे-कार

Wed, 06 Apr 2022 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली

सार

पेट्रोल बाइक से भी सस्ती सीएनजी कार में सफर करने वाली बातें गुजर चुकी हैं। बीते 6 महीने में सीएनजी करीब 41 फीसदी महंगी हुई है। इससे पेट्रोल वाहन की जगह जिन्होंने महंगे सीएनजी वाहन खरीदे थे, अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वहीं, सीएनजी कार से दफ्तर आने-जाने वालों का बजट भी बिगड़ गया है। कई लोगों ने तो सीएनजी कार के बजाय अन्य सार्वजनिक वाहनों को अपनाना शुरू कर दिया है...
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में पिछले छह महीने से सीएनजी की कीमत लगातार बढ़ रही है। पिछले साल अक्तूबर में सीएनजी की कीमतें 45.5 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 4 अप्रैल से बढ़ोतरी के बाद अब यह 64.11 रुपये तक पहुंच गई है, यानी सीएनजी से वाहन चलाने वालों की भी जेब ढीली होने लगी है।

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पंप पर सीएनजी ही नहीं, शोरूम में सीएनजी कार भी महंगी है। पेट्रोल कार की तुलना में छोटी कार डेढ़ से दो लाख रुपये महंगी है। पहले तो लोग यह सोचकर महंगी सीएनजी कार खरीद रहे थे कि पेट्रोल के अपेक्षा सीएनजी सस्ती है,  लेकिन अब यह भी गुजरे जमाने की बात होने जा रही है।

ऐसे में सीएनजी कार खरीदने वाले भी सोच में पड़ गए हैं कि महंगी सीएनजी कार खरीदें या सस्ती पेट्रोल कार। इलेक्ट्रिक कार इतनी महंगी हैं कि निम्न मध्यम वर्ग फिलहाल खरीदने से कतरा रहा है। वहीं, चार्जिंग स्टेशन को लेकर भी दूरी बनाए हुए हैं।
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और बढ़ सकती हैं कीमतें 
जिस तरह से पेट्रोलियम पदार्थ के दाम में इजाफा हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि फिलहाल सीएनजी की कीमतों में कमी होने की जगह इजाफा ही होने वाला है। सिलसिला 64.11 रुपये प्रति किलोग्राम तक थमने वाला नहीं है। जिस प्रकार केंद्र ने नेचुरल गैस की कीमत में दोगुनी बढ़ोतरी की है, उसके बाद सीएनजी और भी महंगी हो सकती है।

ऑटो से यात्रा भी महंगी
जिस तरह से सीएनजी की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है इससे साफ जाहिर है कि जल्द ही ऑटो से चलाना भी महंगा हो सकता है। दिल्ली में ऑटो वाले अभी से ही ज्यादा किराया मांगने लगे हैं। मीटर से चलने के लिए जोर देने पर उनका जवाब होता है कि सीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में ऑटो की किस्त देना भी भारी पड़ रहा है। 

आकड़ों की नजर में प्रति लीटर पेट्रोल और प्रति किलोग्राम सीएनजी से चलने वाले वाहन

  • छह महीने पहले पेट्रोल की कीमत 107.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंची थी।
  • उस समय सीएनजी के दाम 45.5 रुपये प्रति किलोग्राम थे।
  • वाहन पर प्रति किमी खर्च
  • एक लीटर पेट्रोल में बाइक 35 से 45 किलोमीटर चलती है, यानी औसत 2 रुपये प्रति किमी खर्च
  • एक लीटर पेट्रोल में कार 20 से 25 किलोमीटर चलती है। औसत 5 रुपये प्रति किमी खर्च
  • एक किलोग्राम सीएनजी में कार 20 से 24 किलोमीटर चलती है। औसत 2 रुपये प्रति किमी खर्च

नोट : पिछले साल पेट्रोल की कीमतें घटती-बढ़ती रही।

एक नजर...

  • वर्तमान में पेट्रोल 103.81 रुपये प्रति लीटर है
  • सीएनजी 64.11 रुपये प्रति किलोग्राम

वाहन पर होने वाला प्रति किमी खर्च

  • एक लीटर पेट्रोल में बाइक 35 से 45 किलोमीटर चलती है। औसत 2 रुपये प्रति किमी खर्च
  • एक लीटर पेट्रोल में कार 20-25 किलोमीटर चलती है। औसत 5 रुपया प्रति किमी खर्च
  • एक किलोग्राम सीएनजी में कार 20-24 किलोमीटर चलती है। औसत 3 रुपया प्रति किमी खर्च होता है

नोट : आंकड़े अर्थशास्त्र के शिक्षक सुनील कुमार के मुताबिक।

डीजल भी ढीली करने लगा है उपभोक्ताओं की जेब

डीजल की कीमत में पिछले 10 दिन में 5 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि हुई है। नुकसान से बचने के लिए ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने माल भाड़ा में बढ़ोतरी कर दी है। इसके लिए नया फॉर्मूला निकाला गया है। इससे रोजमर्रा के उत्पादों समेत सभी जरूरी सामान की कीमत में धीरे-धीरे इजाफा होने लगा है। 

माल भाड़े में करीब 6 से 10 फीसदी वृद्धि हुई है और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ने लगा है। खासतौर पर सस्ते सामान की कीमतों पर इसका सर्वाधिक असर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल के रेट में लगातार होने वाली बढ़ोतरी से किराये में वृद्धि करना मजबूरी है। माल ढुलाई के लिए मुख्य तौर पर अलग-अलग साइज के ट्रक समेत दूसरे माल ढोने वाले वाहनों का इस्तेमाल होता है। इनसे एक से दूसरी जगह के लिए आवश्यक उपभोक्ता उत्पादों की आपूर्ति होती है। जानकारों के मुताबिक, अगर कीमत में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो इससे महंगाई और बढ़ेगी।

10 दिन में इतनी वृद्धि
तारीख    रुपये      बढ़ोतरी

27 मार्च    90.42    0.55 
28 मार्च    90.77    0.35
29 मार्च    90.77    0.00
30 मार्च    92.27    1.50
31 मार्च    93.07    0.80
01 अप्रैल    93.07    0.00
02 अप्रैल    93.87    0.80
03 अप्रैल    94.67    0.80
04 अप्रैल    95.07    0.40
05 अप्रैल    95.87    0.80
नोट : आंकड़े रुपये में हैं।

ट्रकों का किराया तय करने में डीजल अहम
एक लीटर डीजल में सामान्य ट्रक से चार किलोमीटर की दूरी तय की जा सकती है। पिछले 10 दिनों में प्रति लीटर पांच रुपये से अधिक की बढ़ोतरी, यानी रोजाना औसतन 50 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों का कहना है कि उत्पाद, दूरी समेत कई और पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किराया तय किया जाता है। इसका असर उपभोक्ता उत्पादों पर भी पड़ने लगा है।   

मजबूरी में नुकसान की भरपाई
दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि डीजल की कीमत में कमी की मांग पर सुनवाई नहीं हो रही है। नतीजतन, किराये के मद में होने वाले नुकसान से बचने के लिए मामूली बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। लंबी दूरी के लिए कई बार रास्ते में भी बढ़ोतरी का असर झेलना पड़ रहा है, क्योंकि भाड़ा तय होने के बाद अचानक बढ़ी हुई दरें ग्राहक चुकाने को तैयार नहीं होते हैं। ऐसे में डीजल की कीमत में बढ़ोतरी के मुताबिक माल ढुलाई के किराये में भी बदलाव किए जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अगर कीमत में रोजाना बढ़ोतरी होने के बजाय एक दिन में ही वृद्धि कर दी जाए तो किराया तय करने में सहूलियत होगी। 

मासिक बढ़ाई जानी चाहिए कीमत
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन प्रदीप सिंघल ने कहा कि डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई पर भी पड़ता है। औसतन डीजल की कीमत में 10 फीसदी की बढ़ोतरी से माल भाड़ा में 6 से 10 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की जाती है। ट्रकों का किराया एक बार तय होने के बाद उपभोक्ताओं से अधिक किराया नहीं ले सकते हैं। सरकार से मांग की है कि डीजल की कीमतें मासिक, त्रैमासिक तौर पर बढ़ाए जाएं। इससे ट्रांसपोर्टर को भी माल ढुलाई का किराया तय करने में मदद मिलेगी। लगातार होने वाली वृद्धि का असर आवश्यक उपभोक्ता उत्पादों समेत दूसरे सामानों पर भी पड़ेगा। सस्ते सामान पर माल भाड़े में बढ़ोतरी का अधिक असर पड़ता है।

एनसीआर के शहरों से दिल्ली की ओर दौड़ते हैं वाहन चालक, बढ़ता है दबाव

दिल्ली में रहने वालों को आए दिन एनसीआर के शहरों में जाना पड़ता है। ऐसे में अगर दिल्ली से बाहर निकले और कार की सीएनजी खत्म हो गई तो ढाई रुपये के करीब प्रति किलोग्राम ज्यादा चुकाना पड़ेगा। दिल्ली में सीएनजी की कीमत 64.11 रुपये प्रति किलोग्राम है।

वहीं, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में 66.68 रुपये है। कानपुर, फतेहपुर और हमीरपुर में 75.90 रुपये तक है और गुरुग्राम में 72.45 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। ऐसे में दिल्ली के सीएनजी पंप पर भी भीड़ बढ़ेगी और घंटों गुजारने के बाद ही सीएनजी भरवाने का मौका मिलेगा।
 
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फुटकर में फलों और सब्जियों के रेट में उछाल, थोक में स्थिर

दिल्ली की मंडियों में आवक का खर्च बढ़ने लगा है। डीजल-पेट्रोल की कीमत बढ़ने से परिवहन की लागत करीब 10 फीसदी बढ़ गई है। हालांकि, अभी तक मंडी में इसका असर फल व सब्जियों पर ज्यादा नहीं दिख रहा है। इसकी वजह यह है कि परिवहन लागत की जगह आवक पर बाजार में फल व सब्जियों के भाव तय किए जाते हैं, जिस दिन आवक ज्यादा होती है, उस दिन भाव कम होते है। आवक कम होने पर भाव बढ़ जाते हैं। आवक ज्यादा होने से अभी फलों व सब्जियों के भाव स्थिर हैं। आने वाले दिनों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

थोक भाव में फिलहाल डीजल-पेट्रोल के बढ़े हुए भाव का बहुत ज्यादा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन इसका असर खुदरा बाजार में दिखने लगा है। रेहड़ी-पटरी पर सब्जी व फल की बिक्री करने वाले महंगाई के पीछे परिवहन लागत का हवाला देने भी लगे हैं। केशवपुर मंडी के अजय चौधरी ने बताया कि डीजल की कीमतें बढ़ने से फल और सब्जियों के दाम भी बढ़ेंगे। 20-25 प्रतिशत तक भाव बढ़ने का अनुमान है।

किसानों पर पड़ेगा असर
आजादपुर मंडी के आढ़ती संदीप खंडेलवाल का कहना है कि भाव में तेजी आएगी। भाड़ा बहुत अधिक बढ़ गया है। किसानों को भी पंप सेट चलाना पड़ता है। ट्रैक्टर से खेती करनी पड़नी पड़ती है। ऐसे में भाव मंदा किसी भी सब्जी या फल का नहीं होने वाला है। आजादपुर मंडी के राजेंद्र शर्मा का कहना है कि उदाहरण के तौर पर जो ट्रक एक रुपया भाड़ा लेकर आता था उस पर 10 हजार अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसमें सैकड़ों किलो प्याज, टमाटर, आलू या अन्य सब्जियां आती हैं। अगर भाव इन फल व सब्जियों का बढ़ता भी है तो 40-50 पैसा प्रति किलोग्राम बढ़ेगा। हालांकि, इसका असर किसानों पर जरूर पड़ेगा। उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा।

डीजल की कीमत बढ़ने से और बढ़ सकती है मुद्रास्फीति की दर 
नई दिल्ली। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तय होती हैं। यूक्रेन युद्ध सहित दूसरेे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसे नियंत्रित करने में केंद्र के साथ राज्य की भी भूमिका होती है। कई ऐसे राज्य हैं, जिनकी तरफ से कर में रियायत न दिए जाने के कारण कीमतें अधिक हैं। अगर केंद्र सरकार की तरफ से टैक्स में राहत दी जाती है तो फिर भी प्रदेश सरकार की भूमिका अहम है।

प्रदेश सरकार की ओर से टैक्स में कमी से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आवश्यक उपभोक्ता उत्पादों पर पड़ने लगा है। अगर ऐसे हालात बने रहे तो हो मुद्रास्फीति की दर सात फीसदी से अधिक पहुंच सकती है। इसके बाद बैंकों की तरफ से वित्तीय स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ और आस्था आईएएस, दिल्ली के निदेशक आर. कुमार ने बताया कि डीजल की कीमत बढ़ोतरी का परिवहन पर सर्वाधिक और सबसे पहले असर पड़ता है। इसके बाद आवश्यक सामान की कीमत बढ़ेगी होगी। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए जरूरी है कि सभी पहलुओं पर मंथन किया जाए। इसमें केंद्र के साथ प्रदेश सरकारों की भी अहम भूमिका होगी। 
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