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सुल्ली डील्स मामला : मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने के लिए बनाए थे 30 ट्वीटर हैंडल, पुलिस ने बताया- कौन, कैसे और क्या करता था

Tue, 11 Jan 2022 07:26 AM IST
Vikas Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

आरोपी ने सुल्ली डील्स एप बनाते हुए तीन देशों की लोकेशन (आईपी एड्रेस) दिखाई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की यूनिट इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑप्स (आईएफएसओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओंकारेश्वर ठाकुर ने जून-जुलाई में सुल्ली डील्स एप बनाई थी।
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सुल्ली डील्स एप के निर्माता और मास्टरमाइंड ओंकारेश्वर ठाकुर - फोटो : ट्विटर एएनआई
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विस्तार
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सुल्ली डील्स मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को बताया कि कथित मुस्लिम महिलाओं की फोटो सोशल मीडिया पर अपोलड करने के लिए 30  ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग किया गया था। दिल्ली पुलिस उस समूह के सदस्यों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिसमें इंदौर का 26 वर्षीय युवक ओंकारेश्वर ठाकुर भी शामिल था।

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पुलिस ने बताया कि ओंकारेश्वर ठाकुर ने इस एप से जुड़ी जानकारी अपने लैपटॉप की सामग्री को हटा दिया था। उससे फिर से प्राप्त करने के लिए लैपटॉप और फोन को राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस लैब में भेज दिया गया है। साथ ही "बुली बाई" एप के निर्माता नीरज बिश्नोई, जिसे असम से गिरफ्तार था उसके फोन और लैपटॉप को भी राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस लैब में भेजा गया है ताकि डिलिट किए गए दस्तावेजों की जांच की जा सके।  जब तक फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट का आती है तब तक पुलिस उस समूह के अन्य सदस्यों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जो ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग कर रहे हैं।

ठाकुर से पूछताछ से पता चला कि वह अपनी एक वेब-डिजाइनिंग फर्म चलाता था, जिसके ग्राहक अमेरिकन थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब उसके पिता से पूछताछ की गई तो उसने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें बेटे के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है क्योंकि वह दिन भर सोता था और रात में काम करता था। 
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब उसके पिता से पूछताछ की गई तो उसने जांचकर्ताओं को बताया कि ठाकुर के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है क्योंकि वह दिन भर सोता था और रात में काम करता था। उन्होंने कहा कि जब उनके माता-पिता ने बेटे से रात भर जागने की आदत के बारे में पूछा, तो उसने उन्हें बताया कि भारत और अमेरिका के बीच समय के अंतर के कारण, उसे ज्यादातर रात भर काम करना पड़ता है, इसलिए उन्होंने बेटे पर कभी संदेह नहीं किया।

पुलिस ने बताया कि ठाकुर और बिश्नोई दोनों को अपनी गतिविधियों पर पछतावा नहीं है। ठाकुर को केवल इस बात का अफसोस है कि उनके कारण उनके परिवार को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों ने देश विरोधी बातें करने वालों को परेशान करने के लिए ये एप बनाई थीं। वह इन लोगों को परेशान करना चाहते थे। साथ ही हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ बोलने वालों को भी सबक सिखाना था। उन्होंने ट्विटर पर कई गुमनाम हैंडल बनाए और अपनी पहचान छुपाने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नंबर (वीपीएन) का इस्तेमाल किया।

पुलिस को शक है कि कथित सुली डील्स एप के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरों को पोस्ट करने और उस पर कमेंट करने के लिए कम से कम तीन से पांच लोग इन कई ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग कर रहे थे।

आरोपी ने सुल्ली डील्स एप बनाते हुए तीन देशों की लोकेशन (आईपी एड्रेस) दिखाई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की यूनिट इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑप्स (आईएफएसओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओंकारेश्वर ठाकुर ने जून-जुलाई में सुल्ली डील्स एप बनाई थी।

आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका उद्देश्य महिलाओं को अपमानित (बोली लगाना नहीं था) करना नहीं, बल्कि इन महिलाओं को अपमानित कर अपने एजेंडे को लेकर सोशल मीडिया में प्रसिद्ध होना चहाता था। इसने ट्विटर हैंडल पर ट्रेड महासभा नाम से जो ग्रुप बनाया था उस पर देश भर के करीब 30 लोग जुड़े हुए थे।

शुरू में इस ग्रुप से तीन लोग जुड़े थे। 14 लोगों ने बाद में ज्वाइन किया था। बाकी लोग बाद में जुड़े थे। बुल्ली बाई एप के निर्माता व मास्टरमाइंड नीरज बिश्वनोई भी ओंकारेश्वर के ट्रेड महासभा ग्रुप से जुड़ा हुआ था। नीरज के खुलासे के बाद ही ओंकारेश्वर को गिरफ्तार किया गया है। ओंकारेश्वर ने भी नीरज की तरह सुल्ली डील्स बनाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल किया था। उसने एप को बनाते समय शुरू में पौलेंड की लोकेशन (आईपी एड्रेस) दिखाया था।

बाद में ट्विटर हैंडल पर ग्रुप को बनाते समय लोकेशन न्यूजीलैंड व बांग्लादेश दिखाई थी। वीपीएन पर दो तरह की फ्री व पेड सर्विस होती हैं। आरोपी ओंकारेश्वर ने नीरज की तरह वीपीएन की फ्री सर्विस का इस्तेमाल किया था। मीडिया की सुर्खिया बनने के बाद ओंकारेश्वर ने एप को डिलीट कर दिया था, जबकि नीरज ने बुल्ली बाई एप को डिलीट नहीं किया था। उसे सुरक्षा एजेंसियों ने डिलीट करवाया था।

इन्होंने गिटहब पर कोड विकसित किया था। गिटहब की पहुंच समूह के सभी सदस्यों के पास थी। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर एप साझा किया था। मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें समूह के सदस्यों द्वारा अपलोड की गई थीं। बुली बाई एप के निर्माता और कथित मास्टरमाइंड माने जाने वाले आरोपी नीरज बिश्नोई से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि वह सोशल मीडिया पर विभिन्न फर्जी पहचानों के साथ बातचीत करता था और समूह चर्चा में शामिल होता था। 

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