बाद में नकली छात्र के सिस्टम से मिले सॉफ्टवेयर और टेक्निकल सर्विलांस, बैंक खाते की मदद से आरोपियों की पहचान की गई। जांच में पता चला कि गुजरात के अहमदाबाद में यह गोरखधंधा चल रहा है। पुलिस की टीम तुरंत गुजरात पहुंची और 24 नवंबर को गुजरात निवासी दीप शाह (19) को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद अगले दिन उसके पिता राजेश शाह (45) को भी अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। इन लोगों की निशानदेही पर दिल्ली के शाहीनबाग इलाके से तीसरे आरोपी मोहम्मद अखलाक आलम (29) को गिरफ्तार कर लिया गया।
दीप शाह और उसका पिता राजेश शाह अहमदाबाद में अपना संस्थान चलाते हैं। वहीं अखलाक भी नोएडा में अपना आईटी संस्थान चलाता है। यह लोग 100 फीसदी परीक्षा पास करवाने की गारंटी देते थे।
अखलाक खुद भी छात्रों से ढील करता था और बाकी पिता-पुत्र उसे छात्र उपलब्ध करवाते थे। परीक्षाओं को हैक करने और पेपर सॉल्व करने का सारा काम अखलाक ही करता था।
अच्छी तकनीकी पढ़ाई व आईटी प्रोफेशनल मोहम्मद अखलाक आलम चंद ही मिनटों में फुलप्रूफ सुरक्षा से लैस ऑन लाइन परीक्षाओं के सिस्टम हैक कर लेता था। इससे पहले वह किसी भी सिस्टम में घुसकर उसे रिमोट एक्सेस पर लेता था। इसके बाद ऑन लाइन परीक्षा लेने वाली कंपनियों को पता भी नहीं चलता था और अखलाक अपना काम कर लेता था।
अपने इस काम के लिए अखलाक को 12 साल का अनुभव है। खुद अखलाक हिमाचल प्रदेश के एक विश्व विद्यालय से आईटी में बीटेक किए हुए है। वह शाहीन बाग में रहने के साथ नोएडा सेक्टर-2 में %7 नेटवर्क सर्विसेज% के नाम से अपना इंस्टीट्यूट चलाता है। वहीं पुलिस के हत्थे चढ़े पिता-पुत्र का भी अहमदाबाद में %ग्रॉस सॉल्यूशन% के नाम से अपना इंस्टीट्यूट चलाते हैं। पुत्र दीप शाहद बीएससी इंजीनियरिंग कर रहा है। वहीं पिता एमबीए पास है। इन लोगों ने करीब 200 लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिये हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईटी इंडस्ट्री में अपने कर्मचारियों टेक्नीकल स्किल को अपग्रेट करने के लिए कंपनियां ऑन लाइन परीक्षाएं लेती हैं। ज्यादातर एग्जाम नामी संस्थान व अन्य से करवाए जाते हैं। इनकी परीक्षाएं पास करने के बाद कंपनियों में प्रमोशन और नौकरियां दी जाती हैं। ऑन लाइन परीक्षा लेने के लिए परीक्षार्थी को पहले ऑन लाइन अपने आपको रजिस्टर्ड करना होता है। इसके बाद कंपनी के दिशा निर्देशों पर सॉफ्टवेयर को डाउनलोड किया जाता है।
माना यह जाता है कि यह सॉफ्टवेयर हैक नहीं हो सकता। इसके बाद जिस कमरे में छात्र की परीक्षा होती है, वहां की जांच और छात्र की डिवाइस की जांच होती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद उसका ऑन लाइन की स्कोर आता है, जिसके बाद सर्टिफिकेट दिया जाता है। आरोपी अखलाक पहले ही सिस्टम में अपने सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवा लेता था। जिसे एग्जाम करवाने वाली कंपनियों के सॉफ्टवेयर पकड़ नहीं पाते थे।
एग्जाम शुरू होते ही खुद परीक्षा देने वाले का सिस्टम अपने कंट्रोल में ले लेता था। इसके बाद खुद ही उसकी परीक्षा को सॉल्व कर देता था। बाद में परीक्षा देने वाले को वादे के अनुसार या उससे भी ज्यादा अंक मिलते थे। आरोपी अलग-अलग ग्रेड की परीक्षाओं के लिए 10 हजार रुपये से कई लाख रुपये तक चार्ज कर लिया करते थे।
फिलहाल इनके अभी 200 छात्रों को परीक्षा पास करवाने का पता चला है। माना जा रही है कि यह संख्या हजारों में जा सकती है। दूसरी ओर दीप शाह और राजेश शाह अपने इंस्टीट्यूट में छात्रों से पास करवाने की बात कर पैसे लेते थे। इसके बाद सारी जानकारी अखलाक को उपलब्ध करवाई जाती थी। अखलाक ही उनकी मदद करता था। माना जा रहा है कि इसमें कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं।
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि डार्कनेट पर आरोपियों की पहचान मो.अखलाक आलम से हुई। अखलाक ने डील कर ली गई। अखलाक एमेजोन जैसी कई परीक्षाओं को हैक कर उनको पास करवाता था। नोएडा के सेक्टर-2, सी-54, में अखलाक का अपना इंस्टीट्यूट है। पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ कर रही है।