नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने स्वीकृत सरकारी आवासीय प्लॉट बता कर निवेशकों से करोड़ों की ठगी करने वाले एक शख्स को महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित कर्जत से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान सीताराम मनोहर पाटिल (61) के रूप में हुई है। आरोपी सीताराम को अदालत ने ठगी के चार मामलों में भगोड़ा करार घोषित किया हुआ था। आरोपी अपने गांव का पूर्व सरपंच रह चुका है। पुलिस उससे पूछताछ कर मामले की मामले की जांच कर रही है।
आर्थिक अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर के सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में शिकायतकर्ता मोहम्मद साजिद ने शिकायत दी थी। उसने आरोप लगाया कि था कि प्रगति लैंड एंड हाउसिंग कॉरपोरेशन के मनोहर सीताराम पाटिल, ऐशले कॉनसिसयो और दत्तात्रे गणपत मोहिते ने उनको कर्जत, रायगढ़, महाराष्ट्र में प्रगति वैली के नाम पर आवासीय भूखंडों की परियोजना के बारे में जानकारी दी।
उसने अनुसार आरोपियों ने आश्वासन दिया कि आवासीय परियोजना को महाराष्ट्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। हालांकि परियोजना को शुरू करने से पहले सरकार से कोई अनुमति नहीं ली गई। यहां तक कि कृषि भूखंड भी कथित व्यक्तियों द्वारा भूमि उपयोग में बदलाव किए बिना बेचे गए थे। ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि कथित फर्म के तीन पार्टनर थे। इसमें ऐशले कॉनसिसयो, दत्तात्रे गणपत मोहिते और सीताराम मनोहर पाटिल शामिल थे। इन लोगों ने अपने नाम पर कर्जत, रायगढ़, महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीदी। बाद में उस पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की।
दिल्ली में इसका विज्ञापन किया गया और एजेंटों के माध्यम से बुकिंग राशि जमा की गई। जांच में रायगढ़ जिला प्राधिकरण से पता चला कि कथित फर्म को आवासीय भूखंड परियोजना शुरू करने की कोई मंजूरी नहीं दी गई। फर्म को भूमि उपयोग में परिवर्तन की कोई अनुमति नहीं दी गई थी। जांच से पता चला कि कथित फर्म ने बड़ी संख्या में बुकिंग की थी।
इसके बाद परियोजना की जमीन विभिन्न निवेशकों को बेच दी। 42 शिकायतकर्ताओं से 75 लाख की ठगी का पता चला। आरोपियों के जांच में शामिल नहीं होने और फरार होने पर अदालत ने इनको भगोड़ा घोषित कर दिया। काफी प्रयास के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपी को नौ अगस्त को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है।