नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बच्चियों के यौन शोषण व अन्य दुष्कर्म मामलों में पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मुआवजा न देने संबंधी ट्रायल कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की कई पीड़ित मुआवजा स्कीम हैं लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा।
अदालत ने सभी अदालतों को हर परिस्थिति में विचार कर उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत दुष्कर्म के दो मामलों में संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने एक मामले में पीड़ित बच्ची और परिवार का पता लगाकर उन्हें मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि परिवार का पता नहीं चल पा रहा।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने एक महिला से दुष्कर्म मामले में आरोपी रणजीत नायक की अपील को खारिज करते हुए पाया कि संबंधित अदालत ने पीड़िता को मुआवजा प्रदान करने के लिए आदेश नहीं दिया। आरोपी को अदालत ने 10 वर्ष कैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
न्यायमूर्ति ओहरी ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय व नालसा द्वारा तय दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट की हर ऐसे मामले में ड्यूटी है कि वह तय स्कीम के तहत पीड़िता व उसके परिवार के पुनर्वास के लिए उचित मुआवजा प्रदान करे। इस मामले में तथ्यों को देखने से स्पष्ट है कि ट्रायल कोर्ट अपनी ड्यूटी में फेल रही है।
उन्होंने कहा यौन शोषण मामलों में दिल्ली पीड़िता मुआवजा स्कीम 2018 के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए। अदालत ने दिल्ली राज्य लीगल सर्विस अथारिटी को चार सप्ताह में उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
बच्ची से यौन शोषण मामले में सजा बरकरार
अदालत ने साढ़े तीन वर्षीय बच्ची के यौन शोषण मामले में आरोपी राकेश उर्फ दीवान की अपील खारिज करते हुए उसे मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने इस मामले में भी पाया कि बच्ची व उसके परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला।
अदालत ने पाया कि पुलिस ने तर्क रखा कि बच्ची व उसका परिवार किसी अन्य स्थान पर चले गए हैं। ऐसे में मुआवजा नहीं दिया जा सका। उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा दिल्ली राज्य लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएसएलएसए) की जिम्मेदारी है कि तय नियमों का पालन करते हुए पीड़ित को मुआवजा प्रदान करे।
अदालत ने मामले के जांच अधिकारी व संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे हर हाल में पीड़िता व उसके परिवार का पता लगाएं। अदालत ने कहा कि पीड़ित परिवार को तय स्कीम के तहत मुआवजा प्रदान करें।