प्रीत विहार निवासी 59 वर्षीय सुभाष झा (बदला हुआ नाम) एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं। छह महीने पहले उन्हें लीवर सिरोसिस हुआ था। साकेत के एक निजी अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टर का कहना है कि उनके ठीक होने का एकमात्र विकल्प लिवर प्रत्यारोपण है, लेकिन अंग दान करने वाला कोई उपलब्ध नहीं है। सुभाष इकलौते ऐसे व्यक्ति नहीं हैं। दिल्ली-एनसीआर में ऐसे हजारों लोग हैं, जो स्वस्थ होने के लिए किसी अंगदाता का इंतजार कर रहे हैं।
कोरोना महामारी के कारण बीते डेढ़ साल में दिल्ली के अस्पतालों में होने वाले अंग प्रत्यारोपण की संख्या में लगातार कमी आ रही है। 2019 की तुलना में 2020 में अंग प्रत्यारोपण में 50 फीसदी की कमी आई। वहीं, 2021 में 2019 के मुकाबले प्रत्यारोपण 70 प्रतिशत घटे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, प्रत्यारोपण में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कोरोना से पैदा हुए हालात है।
संक्रमितों के अंग नहीं होते प्रत्यारोपित
राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के डॉक्टर देश दीपक बताते हैं जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके परिजनों की इच्छा से मरीज के अंगों को दूसरे व्यक्ति में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके अलावा ब्रेन डेड हुए मरीज और सामान्य व्यक्ति भी अंगदान करते हैं। अंग प्रत्यारोपण से पहले यह जांच की जाती है कि जिस व्यक्ति का अंग लिया जा रहा है उसमें किसी प्रकार का संक्रमण तो नहीं है। लेकिन पिछले एक साल से अधिकतर लोगों की मौत कोरोना से हुई है। ऐसे में उनका कोई भी अंग किसी दूसरी मरीज में प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता था। इसके अलावा जिन अस्पतालोें में लिवर और किडनी के मरीजों को इलाज दिया जाता था, उनको कोविड विशेष बनाया गया था। ऐसे में वहां भी प्रत्यारोपण नहीं हो सके। यही कारण है कि पिछले डेढ़ सालों में अंगदान वाले आंकड़ों में कमी आई है।
गंभीर मरीजों के सामने संकट
साकेत के मैक्स अस्पताल के यूरो-ओंकोलॉजी रोबोटिक एंड किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के डॉक्टर अनंत कुमार बताते हैं कि कोविड से पहले दिल्ली अंगदान के बड़े राष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभर रहा था। लेकिन कोरोना के चलते अंगदान का सिलसिला काफी कम हो गया है। इससे उन मरीजों के सामने जान का संकट पैदा हो गया है जिन्हें जिंदगी के लिए दूसरे लोगों के स्वस्थ अंगों की सख्त जरूरत है।
डॉ अनंत के मुताबिक, अंगदान में आई कमी का कारण कोरोना के अलावा लोगों भी जागरूकता की कमी भी है। महामारी के इस दौर में अंग की जरूरत वालों और अंगदाताओं के बीच जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाना होगा। लोगों को बताना होगा कि महामारी के समय में भी अंगदान सुरक्षित है। सरकार ने सख्त प्रोटोकॉल तैयार किया है। इसलिए चिंता की बात नहीं है।
इस साल अब तक 160 लिवर प्रत्यारोपित
नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (नोटो) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इस साल अब तक लिवर के 150 से 160 और किडनी के 280 प्रत्यारोपण हुए है। 2020 में किडनी के 520 और लिवर के 470 प्रत्यारोपण हुए। जबकि, महामारी से पहले यानी 2019 में किडनी के 1416 और लिवर के 358 प्रत्यारोपण हुए थे।