कोरोना महामारी के कारण तीनों नगर निगमों की चुनाव प्रक्रिया में कई परिवर्तन होंगे। दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथ) की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं, मतदान का समय भी बढ़ाया जाएगा। आयोग की कोशिश है कि कोविड प्रोटोकॉल के साथ चुनाव करवाया जाए। इससे अप्रैल में होने वाले चुनाव में लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।
अधिकारियों का कहना है कि वार्ड स्तर पर मतदान कक्षों की सूची तैयार कर ली गई है। बुधवार से वार्डों के रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों में पोलिंग बूथ की सूची का निरीक्षण किया जा सकेगा। दिल्ली राज्य चुनाव आयोग के अनुसार तीनों नगर निगम के समस्त 272 वार्डों में 14 हजार से अधिक मतदान कक्ष होंगे। कारोना महामारी के कारण करीब पांच सौ मतदान कक्ष बढ़ाए जा रहे है। वर्ष 2017 में यह संख्या करीब 13 हजार थी। इस तरह यह आंकड़ा करीब नौ सौ अधिक है। हालांकि, मतदाताओं की संख्या करीब 14 लाख बढ़ी है।
आज जारी होगी पोलिंग बूथ की सूची
चुनाव आयोग की ओर से बुधवार को समस्त 272 वार्डों के रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों में मतदान कक्षों की सूची जारी की जाएगी। इस दौरान आम लोग, चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उनका निरीक्षण करने के साथ-साथ अपनी आपत्ति भी दर्ज कराएंगे। वह 28 फरवरी तक सुझाव एवं आपत्ति दे सकेंगे। इसके बाद चुनाव आयोग मतदान कक्षों की सूची को अंतिम रूप देगा।
11 घंटे तक हो सकता है वोटिंग का समय
आयोग की कोशिश है कि मतदान के दौरान कोरोना महामारी की रोकथाम के सभी दिशा-निर्देशों का पालन कराया है। मगर इससे मतदान की रफ्तार पर असर पड़ने की आशंका है। लिहाजा आयोग ने मतदान का समय बढ़ाने का निर्णय लिया है। हालांकि, मतदान का अभी समय तय नहीं है। माना जा रहा है कि इस बार 10 से 11 घंटे मतदान का समय तय होगा। आयोग ने वर्ष 2017 में सुबह आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक मतदान कराया था। इस बार सुबह सात बजे या साढ़े सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान कराया जा सकता है।
मतदान कक्षों में मतदाताओं की संख्या कम की
दिल्ली राज्य चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी की स्थिति का ध्यान रखते हुए प्रति मतदान कक्ष में मतदाताओं की सीमा अधिकतम रखने के मामले में परिवर्तन किया है। आयोग ने एक मतदान कक्ष में अधिकतम 1350 मतदाताओं की संख्या निर्धारित की है। आयोग ने पहले एक मतदान कक्ष में 1250 मतदाताओं की संख्या तय की थी। दरअसल अनेक मतदान केंद्रों में भूतल पर कक्षों की संख्या पर्याप्त नहीं मिली। इस कारण आयोग नेेे मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी करने का निर्णय लेना पड़ा। वर्ष 2017 में एक मतदान कक्ष में अधिकतम 1500 मतदाताओं की संख्या निर्धारित थी।