दिल्ली मास्टर प्लान 2041 का आईडिया एक बार फिर उसी राह पर आगे बढ़ने जा रहा है जिन पर चलकर अब तक इसके पुराने मास्टर प्लान फेल होते रहे हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि मास्टर प्लान में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके दम पर दिल्ली की शक्ल-सूरत बदली जा सके, और इसकी समस्याओं से छुटकारा मिल सके। आरोप तो यहां तक हैं कि इस मास्टर प्लान के कई पैराग्राफ पुराने मास्टर प्लान से जैसे का तैसे कॉपी-पेस्ट कर दिए गये हैं। यानी इस मास्टर प्लान के नाम पर कुछ नया करने की बजाय केवल खानापूर्ति करने की कोशिश की गई है।
बड़ी समस्याएं
शहरी मामलों के विशेषज्ञ और दिल्ली नगर निगम की वर्क्स कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जगदीश ममगाईं के अनुसार दिल्ली मास्टर प्लान 2041 की सबसे बड़ी कमी यही है कि यह आगामी चुनौतियों से निपटने के लिए नहीं, बल्कि केवल लोकलुभावन घोषणाएं करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि नए मास्टर प्लान के लिए ठोस मेहनत नहीं की गई है, कई चीजें तो पुराने मास्टर प्लान से ही कॉपी कर ली गई हैं।
आज तक जितने भी मास्टर प्लान बनाए गए, उनकी अनेक महत्त्वपूर्ण घोषणाओं पर कोई काम नहीं किया गया। इसका परिणाम हुआ कि दिल्ली में अवैध निर्माण पर लगाम नहीं कसी जा सकी है, जो आज किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। आज दिल्ली के कुल आवासीय इकाइयों में लगभग 40 लाख या 95 फीसदी इकाइयां अवैध हैं। इन्हें तोड़कर नव निर्माण करना भी किसी सरकार के लिए आसान नहीं है क्योंकि इन्हीं इलाकों में दिल्ली की सर्वाधिक आबादी रहती है। मास्टर प्लान के समय से पूरा न होने पर जब तक उसे पूरा किया जाता है तब तक दिल्ली की आबादी में भारी बढ़ोतरी हो जाती है जो सारे विकास कार्यों को निगल जाती है।
सरकार की बिना विचारे नीतियां लागू करने का दुष्परिणाम यह हुआ है कि इसकी लैंड पूलिंग जैसी योजनाएं असफल साबित हुई हैं। सरकार ने अवैध कॉलोनियों को ही पक्का करने का तरीका अपनाया है, लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि इसके प्रति लोगों का कोई रुझान नहीं है। अब तक दो-तीन हजार लोग भी अपने मकानों की रजिस्ट्री के लिए सामने नहीं आये हैं। किसी भी मास्टर प्लान के लिए भूमि पहली आवश्यकता होती है, लेकिन दिल्ली के पास अब कोई भूमि शेष नहीं है। लिहाजा कोई भी मास्टर प्लान बनाएं, उसका विकास करने के लिए चौड़ी सड़कें, स्कूल, अस्पताल, जल निकासी व्यवस्था बनाना संभव नहीं है। इसके लिए अवैध कॉलोनियों को तोड़ने और सबको एक साथ दूसरी जगह बसाने का काम करना पड़ेगा जो संभव नहीं है।
आम आदमी पार्टी नेता सोमनाथ भारती ने आरोप लगाया है कि मास्टर प्लान में नई सड़कें निकालने के नाम पर हजारों घरों को तोड़ने की रणनीति बना दी गई है। इससे लाखों परिवार बेघर हो जाएंगे। यानी कुछ नया बनने से पहले ही उसके विरोध का रास्ता तैयार हो गया है। यह समस्या भी ऐसी है जिसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञ इन्हीं समस्याओं की तरफ इशारा कर रहे हैं।