लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि उनके यहां कोविड वार्ड को लेकर तैयारियां पूरी हैं। अस्पताल में ही जीनोम सीक्वेसिंग की सुविधा है। ऐसे में अगर कोई संदिग्ध या कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती होता है तो उसके सैंपल की सीक्वेसिंग भी यही होगी और कोरोना के वेरिएंट का पता भी चल पाएगा।
डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण की पहचान आरटी पीसीआर या फिर रैपिड जांच में हो जाती है लेकिन मरीज के अंदर कौन सा वैरिएंट है? यह जानने के लिए जीनोम सीक्वेसिंग की जाती है। यही कारण है कि नए वेरिएंट की वजह से जीनोम सीक्वेसिंग को प्राथमिकता देने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईसीयू, सामान्य बिस्तर और ऑक्सीजन इत्यादि की व्यवस्था उनके यहां है। साथ ही स्टाफ को भी अलर्ट पर रखा गया है।