दो दिन पहले मीडिया को जारी बयान में सिसोदिया ने कहा था कि दिल्ली के एलजी हर छह महीने में पीडब्ल्यूडी सचिव को बदल रहे हैं। नौ महीने पहले ही एलजी ने कार्यभार संभाला है। एलजी दफ्तर के सूत्रों ने संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सिसोदिया ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जो मुख्यमंत्री और आप आदमी पार्टी के मंत्रियों की पहचान बन चुकी है।
लोक निर्माण विभाग के सचिवों के स्थानांतरण के मामले पर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बयान पर उपराज्यपाल ने निशाना साधा है। दो दिन पहले सिसोदिया की तरफ से जारी बयान को झूठा और भ्रामक बयान बताते हुए बुनियादी जानकारी के आभाव होने की बात भी कही गई है। एलजी दफ्तर के सूत्रों का कहना है कि सिसोदिया की विफलता से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दिए गए हैं। आम आदमी पार्टी के अधीन लोक निर्माण विभाग की सड़कों दयनीय हालत है तो कई परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं।
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दो दिन पहले मीडिया को जारी बयान में सिसोदिया ने कहा था कि दिल्ली के एलजी हर छह महीने में पीडब्ल्यूडी सचिव को बदल रहे हैं। नौ महीने पहले ही एलजी ने कार्यभार संभाला है। एलजी दफ्तर के सूत्रों ने संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सिसोदिया ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जो मुख्यमंत्री और आप आदमी पार्टी के मंत्रियों की पहचान बन चुकी है। एलजी के लिए झूठे और काल्पनिक बयान देकर न्यायालय के आदेशों और संवैधानिक प्रावधानों की भी अनदेखी की गई है। सुप्रीम कोर्ट में सेवाओं में चल रहे मामले को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह बयान दिया गया है। एलजी सूत्रों का कहना है कि उपराज्यपाल के कार्यभार संभालने के नौ महीने के दौरान सचिव (पीडब्ल्यूडी) का स्थानांतरण नहीं किया गया है।
16 सितंबर, 2022 को पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव राजेश प्रसाद का केंद्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर में सेवा के लिए रिलीव किया गया। इस साल 15 फरवरी को सचिव(पीडब्ल्यूडी) के तौर पर कार्यरत विकास आनंद को रिलीव करने के बाद केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव का पदभार ग्रहण किया। इसके लिए उन्हें पैनल में पहले ही शामिल किया गया था।
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सूत्रों का कहना है कि सिसोदिया को इस बात का भी पता होना चाहिए कि किसी भी संवर्ग में अधिकारियों को कार्मिक एवं प्रशिक्षाण विभाग जबकि एजीएमयूटी कैडर के मामले में गृह मंत्रालय के निर्धारित प्रावधानों के तहत की जाती है। ऐसे तबादले या कार्यमुक्ति किसी की मर्जी से नहीं की जाती है। सिसोदिया की तरफ से ऐसे बयान से लगता है कि भ्रष्ट राजनेताओं, सिविल सेवकों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के साथ सांठगांठ कर उन्हें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में स्थापित किया जाना था।