सत्येंद्र जैन के मुताबिक, पायलट प्रोजेक्ट के तहत 30 कुएं बनाए गए। इसका मकसद यह जानना था कि क्या नए और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके पानी की उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है या नहीं। उन्होने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट 100 फीसद सफल रहा। अब ऐसे 70 और कुएं परिसर में बनाएगी।
उन्होंने बताया कि इन आधुनिक कुओं की मदद से हमें प्रति दिन 1.2 से 1.6 मिलियन गैलन पानी उपलब्ध होगा, जो एक आम ट्यूबवेल के मुकाबले छह से आठ गुना ज्यादा है। इसके बन जाने से पूर्वी दिल्ली में अब पानी की सप्लाई 25-30 फीसद तक बढ़ जाएगी।
अत्याधुनिक कुएं इस तरह करते हैं काम
डिजाइन और निर्माण सामग्री में बदलाव करके आधुनिक कुओं को तैयार किया गया है। इससे पानी कुएं के भीतर ही उपचारित हो जाए। नतीजा नया वॉटर ट्रीटमंट प्लांट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इनके बनने से अब पानी की सप्लाई 25-30 फीसद बढ़ जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि इससे भूजल स्तर पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इन नए कुओं का सिस्टम इस तरह का है कि बारिश के मौसम में ये खुद-ब-खुद भूजल को दोबारा से रीचार्ज कर सकेंगे। इस कुएं का व्यास 1-1.5 मीटर और गहराई 30 मीटर है। साधारण कुओं में ये 0.3 मीटर होता है।