पिछले साल 16 नवंबर को प्रभाव में आई थी आबकारी नीति
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कोर्ट को बताया कि आबकारी नीति पिछले साल 16 नवंबर को प्रभाव में आई और आबकारी नीति की समाप्ति को लेकर याचिकाकर्ताओं का रुख सही नहीं है। उन्होंने बताया कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह नीति जारी रहेगी। यह बदलाव 30-40 साल बाद आया है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी नई व्यवस्था के अंतरिम चरण में कार्यान्वयन में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के बयान को रिकॉर्ड पर रखा और सभी पक्षों को इस मामले में लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एक दूसरे याचिकाकर्ता शराब के खुदरा विक्रेता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी और जी तुषार राव ने तर्क दिया कि नई नीति से एकाधिकार को बढ़ावा मिलता है और इससे भेदभाव होता है।
हाई कोर्ट में नई आबकारी नीति के खिलाफ कई याचिकाएं इस आधार पर लंबित हैं कि यह अवैध, अनुचित और मनमानी होने के साथ-साथ दिल्ली आबकारी अधिनियम, 2009 का उल्लंघन करती है।