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दिल्ली : वाहन चोरी किया तो खैर नहीं...पुलिस पकड़ लेगी, पलक झपकते ही मिलेगा पूरा ब्योरा

Fri, 26 Nov 2021 04:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली

सार

घटनाओं को रोकने के लिए वेहीस्कैन एप तीन जिलों में शुरू। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है सिस्टम। 
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विस्तार
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वाहन चोरों पर शिकंजा कसने के लिए दिल्ली पुलिस ने अत्याधुनिकता की तरफ एक और कदम बढ़ाया है। अब मोबाइल में वाहन का नंबर डालते ही पता चल जाएगा कि वह चोरी का है या फिर उसका रजिस्ट्रेशन नंबर आधा-अधूरा है। वेहीस्कैन एप के माध्यम से पुलिस चोर को मौके पर ही दबोच लेगी। नई दिल्ली समेत तीन जिलों में यह एप दो दिन पहले शुरू किया गया है, जो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डाटा बैंक, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एप वाहन से जुड़ा है। जैसे ही पुलिसकर्मी वाहन का नंबर एप में डालेगा तो चोरी की एफआईआर समेत तमाम डाटा उपलब्ध हो जाएगा।

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नई दिल्ली जिला डीसीपी दीपक यादव का कहना है कि एप के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। नई दिल्ली जिले में दो दिन में ही बाराखंभा व चाणक्यपुरी समेत तीन जगहों पर वाहन चोर पकड़े भी गए हैं। उन्होंने बताया कि वेहीस्कैन एप को नई दिल्ली, द्वारका व बाहरी जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो दिन पहले शुरू किया गया है। यह एप बीट स्टाफ के अलावा पेट्रोलिंग और पिकेट चेकिंग स्टाफ के मोबाइल में डाउनलोड की गई है। 

चेकिंग कर रहा पुलिसकर्मी जैसे ही किसी संदिग्ध वाहन का नंबर एप में डालेगा तो इससे पता चल जाएगा कि वाहन की नंबर प्लेट असली है या फर्जी। वह चोरी का है या नहीं। वाहन का मूल रंग कौन सा है। यह एप एनसीआरबी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की एप वाहन के डाटा बैंक से जुड़ा हुआ है। इस एप के जरिए यह आसानी से पता चल जाएगा कि वाहन कहां रजिस्टर्ड है और उसका मालिक कौन है। वाहन कहां से चोरी हुआ है। आधी-अधूरी नंबर प्लेट लगाकर वारदात करने वाले भी पकड़े जा सकेंगे।
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पूरा स्टाफ कर सकेगा इस्तेमाल
डीसीपी ने बताया कि ई-बीट बुक में यह सिस्टम है, लेकिन उसमें यह बहुत ही धीमा है। ई-बीट बुक में सिर्फ बीट अफसर के मोबाइल में ही यह सिस्टम होता है। वेहीस्कैन एप बीट अफसर के अलावा चेकिंग व पेट्रोलिंग स्टाफ के मोबाइल में भी होगी। चेकिंग के दौरान जब वाहन का नंबर चेक किया जाएगा तो मौके पर ही पता लग जाएगा कि वह चोरी का है या नहीं। ई-बीट बुक से संदिग्ध वाहन नहीं पकड़े जा सकते हैं।

...कहीं नंबर तो नहीं बदले गए हैं
ई-बीट बुक में डाटा सिर्फ दिल्ली पुलिस के जिपनेट से जुड़ा हुआ है, जबकि वेहीस्कैन एप में यह जिपनेट के अलावा के अलावा एनसीआरबी व केंद्रीय राजमार्ग और सड़क मंत्रालय से जुड़ा होगा। इससे यह पता लग जाएगा कि वाहन कहां रजिस्टर्ड है और कहां से चोरी हुआ है। असली रंग कौन सा है। उसके इंजन व चेसिस नंबर बदले गए हैं या नहीं। 

जल्द ही पूरी दिल्ली में किया जाएगा लागू
डीसीपी ने बताया कि वेहीस्कैन एप अगर सफल रहा तो जल्द ही इसे पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा। अभी ये सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तीन जिलों में लागू किया गया है। साउथ जोन के विशेष पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की पहल पर इस सिस्टम को शुरू किया गया है।

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