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दिल्ली दंगा : 758 मामलों में से 361 में आरोपपत्र दाखिल, 67 में आरोप तय

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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि चार अक्तूबर तक दिल्ली दंगों से संबंधित 758 मामलों में से 361 में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। उनमें से 67 में आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने पुलिस को शपथपत्र सहित वर्तमान में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच किसी अन्य जांच एजेंसी से करवाने पर आपत्ति जताई है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने हाल ही में पुलिस से निचली अदालतों के समक्ष लंबित मामलों के रिपोर्ट मांगी थी। उसी के जवाब में यह रिपोर्ट पेश की है।
पीठ पिछले साल हुई हिंसा और नेताओं द्वारा कथित घृणा फैलाने वाले भाषणों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसके कारण नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हिंसा हुई। अदालत ने कहा कि वर्तमान रिपोर्ट रिकार्ड पर लाई जाए।
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अदालत ने मामले की सुनवाई 28 जनवरी 2022 तय करते हुए दिल्ली पुलिस को निचली अदालतों के समक्ष लंबित मामलों का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया है।
जांच एजेंसी ने अक्तूबर में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि हालांकि 287 मामलों में अभी आरोप तय किए जाने हैं, लेकिन चार एफआईआर को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।
पुलिस ने रिपोर्ट में कहा है कि सभी लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जबकि दो मामलों में आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया है, एक को बरी किया गया है। दर्ज किए गए 758 मामलों में से 695 मामलों की जांच उत्तर-पूर्व जिला पुलिस कर रही है।
हत्या आदि जैसी बड़ी घटनाओं से संबंधित 62 मामलों को अपराध शाखा को हस्तांतरित किया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार निगरानी में तीन विशेष जांच टीमों (एसआईटी) को नियोजित करके उक्त मामलों में जांच शुरू की थी। सांप्रदायिक दंगों की गहरी साजिश के एक मामले की जांच स्पेशल सेल द्वारा की जा रही है।
अक्तूबर के हलफनामे में दावा किया गया था कि जांच जल्द, निष्पक्ष और कानून के अनुसार जांच की रही है और मामलों को नए सिरे से एसआईटी में भेजने का कोई आधार नहीं है।
याची के तर्क
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ आप नेता मनीष सिसोदिया, अमानतुल्ला खान और एआईएमआईएम विधायक वारिस पठान ने नफरत भरे भाषण दिए। अदालत अजय गौतम की उस जनहित याचिका पर भी सुनवाई कर रही है, जिसमें हिंसा की यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून) के तहत एनआईए जांच की मांग की गई है।
अदालत से आग्रह किया गया है कि वह केंद्र को निर्देश दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आंदोलनों के पीछे ‘राष्ट्र विरोधी ताकतों’ का पता लगाने और पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका की जांच करें।
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