दिल्ली पुलिस द्वारा जेएनयू छात्र शरजील इमाम के भड़काऊ भाषण में अस सलामू आलेकुम को एक समुदाय विशेष के लिए संबोधित किए जाने की टिप्पणी पर दिल्ली दंगों के आरोपी और कार्यकर्ता खालिद सैफी ने कहा कि सलाम गैरकानूनी है तो वह इसे कहना बंद कर देगा। दिल्ली पुलिस ने एक सिंतबर को कोर्ट में कहा था कि आरोपी शरजील का अस सलामू आलेकुम का संबोधन जनसमूह के लिए नहीं था।
सैफी ने कहा मैं अपने दोस्तों का हमेशा सलाम कहकर अभिवादन करता हूं। यदि यह गैरकानूनी है तो मैं ऐसा कहना बंद कर दूंगा। वीडियो कांफ्रेंस के जरिए 10 सितंबर को सुनवाई के दौरान सैफी ने अतिरक्त सत्र न्यायाधीन अमिताभ रावत से सवाल किया कि क्या यह कानून है या महज अभियोजन टीम की परिकल्पना है। इस पर अदालत ने कहा कि यह अभियोजन पक्ष का तर्क था न की अदालती कार्यवाही का शब्द।
गत एक सितंबर को विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने 16 जनवरी 2020 को अलीगढ़ में दिए दंगा आरोपी शरजील इमाम के भाषण का जिक्र करते हुए अदालत को बताया था कि उसका अस सलामू आलेकुम कहा जाना एक समुदाय विशेष को संबोधित करना था।
सैफी ने कहा कि जब कभी उसे जमानत मिलेगी, वह राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी ) में पुलिस के खिलाफ दंगों की साजिश से जुड़े 20 लाख दस्तावेज जलाने के आरोप में केस दायर करेगा। पुलिस ने सैफी और अन्य को आंतक रोधी कानून के तहत गिरफ्तार किया है। इन पर फरवरी 2020 के दंगों के मास्टर माइंड होने के आरोप हैं, जिनमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इनके अलावा जेएनयू का पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलिता, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित कई अन्य को भी पुलिस ने इसी कानून के तहत गिरफ्तार किया था।