दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटे द्वारा अपने बीमार पिता को लीवर का हिस्सा दान में देने के मुद्दे पर नई चिकित्सा रिपोर्ट की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। अदालत ने कमेटी को नाबालिग की नई चिकित्सा रिपोर्ट का पुन: निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि उम्मीद जताई जा रही है कि अगर 17 साल और 9 महीने का लड़का लिवर और बिलियरी साइंसेज संस्थान (आईएलबीएस) से मिली अपनी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अपने लीवर का एक हिस्सा दान करने के लिए फिट पाया जाता है तो उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा गठित समिति उसे आवश्यक मंजूरी देने के लिए अपनी पहले की रिपोर्ट पर पुनर्विचार करेगी। अदालत ने कहा कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि उसके पिता की जान बचाई जा सके।
अदालत ने कहा कि इस मामले में शामिल तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता को 16 से 20 अक्तूबर के बीच किसी भी तारीख को मामले की लिस्टिंग के लिए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी जाती है। फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई 21 अक्तूबर तय की है।
अदालत को बताया गया कि लड़के की नई मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, जिसमें कहा गया कि समिति द्वारा पूर्व में याचिकाकर्ता के अनुरोध को अस्वीकार करने का एकमात्र कारण इस तथ्य पर आधारित था कि लड़के की फिटनेस के कुछ पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर नहीं थे।