साजिश के एक मामले में बरी होने के बावजूद ईरान में फंसे पांच भारतीय नाविकों के परिवारों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उनकी कुशलता से वापसी की मांग की है। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से विदेश मंत्रालय से इस मुद्दे को ईरान सरकार के साथ उठाने और उन्हें स्वदेश भेजने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है। याचिका में इसके अतिरिक्त केंद्र पर पर्याप्त चिकित्सा और वित्तीय सहायता, भोजन और आवास और कांसुलर सेवाओं के रूप में तत्काल राहत प्रदान करने के लिए निर्देश देने का भी आग्रह किया है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र सरकार को स्पष्ट करने का निर्देया दिया है कि इस मामले में नाविकों को स्वदेश लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है। याची के अनुसार पांच नाविकों को यूएई में नौकरी का आश्वासन दिया गया था, हालांकि उन्हें ईरान ले जाया गया। वे वहां एक मालवाहक पोत में शामिल हो गए जिसके बाद उन्होंने मेनियल ड्यूटी करना शुरू कर दिया था।
पिछले साल फरवरी में ईरानी अधिकारियों द्वारा पोत में मारे गए छापे पर उपरोक्त नाविकों के साथ कप्तान को गिरफ्तार किया गया था और उस पर गहरे समुद्र में मादक पदार्थों की तस्करी की साजिश रचने का आरोप था। बाद में पोत के मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार निचली अदालत ने इस साल 9 मार्च को सभी को बरी कर दिया था, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट और लगातार डिस्चार्ज सर्टिफिकेट सौंपने से इंकार कर दिया बावजूद इसके वे 403 दिन तक सलाखों के पीछे बंद रहे। याचिकाकर्ता के अनुसार यह मामला कथित तौर पर ईरान की सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो गया है, हालांकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि इस पर अंतिम फैसला कब होने की संभावना है।
याची ने कहा कि इस मामले पर अभी भी ईरान के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं किया है, लेकिन उनके परिवार के सदस्य अधर में लटके हुए हैं। उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं है न ही उन्हें ईरान में कोई रोजगार नहीं मिल सकता है। याचिका में कहा गया है कि तेहरान में भारतीय दूतावास को दिए गए ज्ञापन के बावजूद कुछ नहीं हुआ और उन्होंने 10 जुलाई 21को एक वीडियो संदेश के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।