उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि डेंगू के मच्छरों के प्रजनन के दोषी पाए जाने वाले संस्थानों पर ऑन-द-स्पॉट पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने के प्रस्ताव की क्या स्थिति है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने अधिकारियों को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई 9 दिसंबर को तय की है।
दिल्ली सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा। अदालत के संज्ञान में लाया गया कि दिल्ली सरकार को 50,000 रुपये का ऑन-द-स्पॉट जुर्माना लगाने के प्रस्ताव पर विचार के लिए कहा गया है। अदालत ने अधिकारियों को मच्छरों के संक्रमण और मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रसार से निपटने के लिए एक सामान्य प्रोटोकॉल को शामिल करने के उद्देश्य से नोडल अधिकारियों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों की एक सूची को आगे बढ़ाने के लिए भी कहा है।
पीठ ने इससे पहले सरकार से दोषी संस्थानों पर लगाए गए जुर्माने की राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की जांच करने को कहा था। पीठ राजधानी में बड़े पैमाने पर मच्छरों के प्रजनन के बारे में एक मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने नोट किया था कि दिल्ली नगर निगम ने जुर्माना 5000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने और मौके पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव दिया था। दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया था कि जुर्माना 5000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है।
मार्च में उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार द्वारा कानून में संशोधन और जुर्माना बढ़ाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की थी इसलिए यह मच्छरों के प्रजनन के खिलाफ एक निवारक कार्य करता है।