दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश लाभ कानून गर्भवती महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा, यह अधिनियम गर्भवती महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से एक लाभकारी कानून है और अधिनियम के प्रावधानों को अक्षरश: लागू किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि संस्थान से गर्भवती महिला कर्मचारी के प्रति सहानुभूति की अपेक्षा की जाती है न कि उसके खिलाफ बेबुनियाद आरोपों की। वह भी तब जब महिला प्रोफेसर अपनी गर्भावस्था के अंतिम चरण में हो। अदालत ने कहा, यह भी स्पष्ट है कि प्रोफेसर से ऑनलाइन कक्षाएं लेने को कहा गया और उन्होंने 27 नवंबर, 2018 तक कक्षाएं लीं।
अदालत ने इसके साथ संस्थान की दलीलें खारिज कर दीं। चूंकि मामले के तीन साल होने को हैं और महिला प्रोफेसर को अब राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उन्हें 50,000 अतिरिक्त खर्च और यदि 30 दिसंबर 2021 तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो 9 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया है। एजेंसी
गुमशुदा लड़की की तलाश जारी रखने का आदेश
उच्च न्यायालय ने दो साल से गुमशुदा लड़की के तलाशी अभियान को जारी रखने का आदेश दिल्ली पुलिस को दिया है। अदालत ने लड़की को तलाश करने और संबंधित अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश पुलिस को दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की पीठ ने लड़की की मां की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने पीठ को बताया कि गुमशुदा लड़की की तलाश के लिए सभी तरह के प्रयास किए गए लेकिन अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पीठ ने जांच रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा है कि पुलिस ने लड़की का पता लगाने के लिए समुचित प्रयास किए जो कि संतोषजनक हैं।