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दिल्ली हाईकोर्ट: 'सुनवाई के दौरान धर्म का नाम लेने से करें परहेज', सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद करने के मामले में टिप्पणी

Thu, 14 Apr 2022 05:01 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

याचिकाकर्ता के वकील ने बहस के दौरान हिंदू धर्म के नाम का उल्लेख किया तो अदालत ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आप कृपया हिंदू जैसे शब्दों का उपयोग करने से बचें। आप सीधे अपना पक्ष रखें। किसी धर्म का नाम लेने की जरूरत नहीं है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने बुधवार को वकीलों से किसी भी मामले में सुनवाई के दौरान धर्म का नाम लेने से परहेज करने को कहा है। अदालत ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा अपने खातों के निलंबन और हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत किसी धर्म के प्रचार के लिए नहीं है। 

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याचिकाकर्ता के वकील ने बहस के दौरान हिंदू धर्म के नाम का उल्लेख किया तो अदालत ने उनके तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आप कृपया हिंदू जैसे शब्दों का उपयोग करने से बचें। आप सीधे अपना पक्ष रखें। किसी धर्म का नाम लेने की जरूरत नहीं है।

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अदालत ने सभी पक्षों के वकील से अपनी दलीलें पूरी करने और लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 28 अप्रैल तय की है। ट्विटर ने खाता धारक वोकफ्लिक्स के खाते को पहले नफरत फैलाने वाले भाषण को बढ़ावा देने के आरोप में पहले निलंबित किया और बाद में उसे हटा दिया।

ट्विटर खुले तौर पर दोहरे मानकों का पालन कर रहा

याची ने कहा कि ट्विटर खुले तौर पर दोहरे मानकों का पालन कर रहा है। जहां हिंदू भावनाओं को किसी न किसी तरह से कुचलने की अनुमति है और अन्य समुदायों की भावनाओं में अलग रुख अपनाया जा रहा है। लिखित जवाब में वोकफ्लिक्स ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट औरंगजेब जैसे नरसंहार अत्याचारियों के सामान्यीकरण में उकसा रही है।

याची ने कहा कि सवाल यह है कि हमें एक धर्मनिरपेक्ष देश में खुद से पूछने की जरूरत है जहां 80 प्रतिशत आबादी हिंदू है। नाजी चरमपंथियों द्वारा एडॉल्फ हिटलर, हेनरिक हिमलर, या रेनहार्ड हेड्रिक की पसंद की प्रशंसा करने वाले पदों की अनुमति देने का साहस करेगा। यदि उत्तर नकारात्मक में है तो हमें अपने आप से यह पूछना चाहिए कि इस देश में हिंदुओं के प्रति समान शिष्टाचार क्यों नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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