फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली हाईकोर्ट : अदालत के फैसले को पैरालंपिक शूटर नरेश शर्मा ने दी चुनौती

Fri, 30 Jul 2021 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • सिंगल जज ने टोक्यो पैरालंपिक में चयन का निर्देश देने से कर दिया था इनकार
  • इस अपील पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष आज सुनवाई होगी। 
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पांच बार के पैरालंपिक शूटर नरेश कुमार शर्मा ने हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है। एकल पीठ ने याची का चयन टोक्यो पैरालंपिक के लिए चयन न करने के पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। इस अपील पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई होगी। 

विज्ञापन


एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता सत्यम सिंह, अमित कुमार शर्मा के जरिये अपील दायर कर अर्जुन पुरस्कार और राजीव गांधी राज्य खेल सम्मान से सम्मानित नरेश शर्मा ने कहा कि एकल पीठ तथ्यों पर उचित नजरिये से विचार करने में नाकाम रही है। पीठ ने इस बात को माना कि पीसीआई ने पैरालंपिक शूटिंग टीम के चयन में अपने खुद के क्राइटेरिया का उल्लंघन किया लेकिन पीठ ने याची को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। 

पेश अपील में कहा गया है कि टोक्यो पैरालंपिक 24 अगस्त से शुरू होने हैं। इसलिए याची का नाम आर-7 शूटिंग स्पर्धा में भेजने का निर्देश पीसीआई को दिया जा सकता है। टोक्यो 2020 आयोजन समिति 2 अगस्त 2021 तक नेशनल पैरालंपिक कमेटी (एनपीसी) की ओर से भेजी जाने वाले आवेदन स्वीकार करेगी। 
विज्ञापन


अपील में कहा गया है कि एकल पीठ पर गौर करने में नाकाम रही कि याची का नाम अभी भी टोक्यो पैरालंपिक 2020 में आर-7 स्पर्धा के लिए भेजा जा सकता है। सिंगल जज का ये कहना गलत था कि उन्हें दूसरे खिलाड़ी दीपक की चयन प्रक्रिया में दखल देने या पीसीआई को नरेश शर्मा का चयन का निर्देश देने का कोई आधार नहीं दिखता।
 
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 27 जुलाई को अपने आदेश में कहा था कि नरेश कुमार की जगत दूसरे खिलाड़ी दीपक का चयन करना पीसीआई जैसी खेल संस्था के लिए अशोभनीय है। संस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी नजरिया अपनाना चाहिए था। 

सिंगल जज ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा था कि याची की इस बात में दम है कि पीसीआई ने शूटर दीपक और अन्य खिलाड़ियों के चयन के लिए विभिन्न तरीका अपनाया था। हालांकि इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था लेकिन सरकार को इसकी जांच करने और कदम उठाने का निर्देश दिया था। 

 

मौत के मुआवजे पर मांगा जवाब

उच्च न्यायालय ने कोविड-19 की वजह से किसी परिवार के आजीविका कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति की मौत पर परिजनों को मुआवजा प्रदान करने की योजना के क्रियान्वयन के आग्रह से जुड़ी दो बच्चों की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले एक व्यक्ति की बच्चों की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र, दिल्ली सरकार तथा अन्य पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय और प्रदान कर दिया। अदालत ने कहा सभी पक्षों ने याचिकाकर्ताओं की शिकायत द्वारा उठाए गए मुद्दो का जल्द समाधान करने के लिए समय मांगा है, ऐसे में वे उन्हें ती नसप्ताह का समय प्रदान कर रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 26 अगस्त तय की है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 की वजह से आजीविका कमाने वाले व्यक्ति की मौत के मामले में परिवारों की सहायता के लिए एक नीति मौजूद है और वह इसे रिकॉर्ड में रखना चाहते है और उसके लिए समय प्रदान किया जाए।

वहीं बच्चों की ओर से पेश अधिवक्ता बी मल्होत्रा ने कहा कि याचिका अत्यावश्क प्रकृति की है और दिल्ली सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कोविड-19 परिवार आर्थिक सहायता नाम से योजना पहले ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन उसका फायदा नहीं मिल रहा।

उच्च न्यायालय की एक अवकाशकालीन पीठ ने जून महीने में कोविड-19 से जान गंवाने वाले 41 वर्षीय एक व्यक्ति की कक्षा सात में पढ़ने वाली बेटी और कक्षा दो में पढ़ने वाले बेटे की याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और उपराज्यपाल को नोटिस जारी किये थे। इन बच्चों के पिता कोरोना वायरस से संक्रमित थे जिन्हें 18 अप्रैल को यहां जयपुर गोल्डन अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया था।

याचिका में कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चों के पिता को बहुत कम ऑक्सीजन प्रदान की गई जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। इसमें अस्पताल के चिकित्सा निदेशक के उस बयान का भी उल्लेख किया गया जिसमें कहा गया था कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से उनके अस्पताल में 20 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोगों का जीवन दांव पर लगा है।

याचिका में आग्रह किया गया है कि ऑक्सीजन की कमी से या कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा प्रदान करने की योजनाओं पर तेजी से क्रियान्वयन करने और राशि त्वरित गति से उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि महामारी की वजह से परिवारों के आजीविका कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति की मौत के मामलों में निजी अस्पतालों में पढ़ रहे उनके बच्चों की शिक्षा से संबंधित योजनाओं को भी तेज गति से क्रियान्वित करने का निर्देश दिया जाए।
विज्ञापन

ऑक्सीजन खरीद मामले में ड्रग कंट्रोलर की खिंचाई

उच्च न्यायालय ने कोरोना महमारी की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन खरीदने के मामले में आप विधायक झ्प्रवीण कुमार के खिलाफ मुकदमा शुरु करने पर दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोलर को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती, जहां केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों ही लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करने में विफल रहे थे। अदालत ने पाया कि विधायक प्रवीण कुमार ने ऑक्सीजन पीड़ित लोगों को निशुल्क प्रदान करने के लिए खरीदी थी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने इसे एक विशेष राजनीतिक दल को टार्गेट करने की कार्रवाई बताते हुए कहा कि ड्रग कंट्रोलर को इसी तर्क का पालन करते हुए गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य संगठनों पर भी मुकदमा चलाना चाहिए जिन्होंने कोविड की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की खरीद की थी। पीठ ने कहा आप उन पर मुकदमा कैसे चला सकते हैं? दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार दोनों ही दिल्ली में लोगों को पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में विफल रहे। 

अदालत ने कहा तीन जून के आदेश में मेडिकल ऑक्सीजन का मुद्दा कोविड दवाओं की जमाखोरी के मुद्दे से अलग है। उन्होंने कहा अपराध में ऑक्सीजन को शामिल करना तकनीकी आधार अलग है और इस प्रकार आप आधी दिल्ली के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। अदालत ने कहा राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की है तो गुरुद्वारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए क्योंकि उन्होंने भी लोगों को ऑक्सीजन की सहायता की लेकिन हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। ऐसे में तो आपको हर गुरुद्वारे, हर मंदिर या सामाजिक संगठन के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।

अदालत ने ड्रग कंट्रोलर को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या वह मेडिकल ऑक्सीजन की खरीद करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरु करना चाहता है। आप क्यों जानबूझकर राजनीतिक दलों को निशाना बना रहे हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मानव त्रासदी को राजनीतिक के लिए इस्तेमाल किया गया है।

ड्रग कंटोलर की और से पेश अधिवक्ता नंदिता राय ने पिछले आदेश में अदालत ने मात्र व्यक्ति प्रयोग के खरीदी ऑक्सीजन के मामले में छूट दी थी। अदालत ने उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आप विभाग से स्पष्ट निर्देश ले कि क्या निशुल्क वितरण के लिए ऑक्सीजन खरीदने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करना चाहते है।

गौतम गंभीर फाउंडेशन के खिलाफ लगाए गए आरोपों के मुद्दे पर पीठ ने कहा आपको किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। वह सिर्फ समाज की मदद करने की कोशिश कर रहे थे। गौतम गंभीर के मामले को उठाने का कारण यह था कि उनके पास बहुत कोविड दवाओं का भंडार था। अदालत ने कहा हो सकता है कि उनका इरादा अच्छा हों लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

गौतम गंभीर फाउंडेशन की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश वसुदेव ने अदालत से आग्रह किया कि वह ऐसी कोई प्रतिकूल टिप्पणी न करे जिसका इस्तेमाल उनके खिलाफ अदालत में मुकदमें के दौरान किया जा सके।

पीठ ने उनके तर्क पर स्पष्ट किया कि हमने सुनवाई के दौरान जो भी टिप्पणियां की हैं, वे ट्रायल कोर्ट में होने वाली सुनवाई उससे प्रभावित न हो। अदालत मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय करती है।

ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने अदालत को सूचित किया है कि उसने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए 8 जुलाई को गौतम गंभीर फाउंडेशन, उसके ट्रस्टियों और सीईओ के साथ-साथ आप विधायकों प्रवीण कुमार और इमरान हुसैन के खिलाफ अदालत में मुकदमा शुरू किया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें