आरोपी 2002 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उसे नवंबर 2020 में उन आरोपों के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था कि वह ड्यूटी पर मोबाइल फोन ले गया था और एक संदिग्ध पीआईओ से संपर्क किया था। बाद में आरोप लगा कि उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से चार मोबाइल फोन और पांच सिम कार्ड बरामद हुए।
कोर्ट को बताया गया कि इसके बाद एक स्टाफ कोर्ट ऑफ इनक्वायरी (एससीओआई) ने पाया कि अन्य चीजों के अलावा याचिकाकर्ता कथित पीआईओ के साथ 2018 से संपर्क में था और मैसेंजर पर उससे लगातार बात करता था। वह उससे अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पीआईओ से बात करता था। जिस दिन मोबाइल जब्त हुआ, उस दिन भी उसने पीआईओ से 8.46 मिनट बात की थी।