जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच का क्या हो रहा है? इसे कौन करवा रहा है? रिपोर्ट कब आती है और किसे दी जाती है? यह सवाल दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र व दिल्ली सरकार से एक महिला की याचिका की सुनवाई के दौरान पूछे। इस महिला के बेटे को विदेश से लौटने के बाद कोविड-19 पॉजिटिव मिलने पर 25 दिसंबर से आइसोलेशन में रखा गया है। हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर को अगली सुनवाई में केंद्र व दिल्ली सरकार को जवाब देने के लिए कहा है।
महिला के अनुसार उसका 18 साल का बेटा संक्त्रस्मण के रिस्क श्रेणी वाले देशों से लौटा तो दिल्ली एयरपोर्ट पर जांच में पॉजिटिव मिला। उसके सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए लेने के बाद कोई ट्रैकिंग नंबर या जानकारी नहीं दी जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही उसे डिस्चार्ज करने की बात अस्पताल ने कही है। हालांकि बेटे को हल्का संक्त्रस्मण हुआ था, लेकिन अब और जांच भी नहीं हो रही है।
केंद्र ने कहा, किसने सैंपल लिया, साफ नहीं?
केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली सरकार ही पूरी व्यवस्था देख रही है। नई गाइड लाइन के अनुसार एयरपोर्ट पर पॉजिटिव मिलने के बाद जीनोम जांच के लिए सैंपल लेना अनिवार्य है। विचाराधीन मामले में एलएनजेपी अस्पताल में सैंपल लिया गया। याचिका से साफ नहीं है कि सैंपल किसने लिए?
कोर्ट ने कहा- हमें मत कहो, आपस में बात करके बताओ
केंद्र के जवाब पर जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार आपस में बात करके अदालत को सारी जानकारी दें। अदालत आपकी गाइड लाइन या प्रोटोकॉल में नहीं पड़ेगी। हमारी चिंता केवल बच्चे को लेकर है। वह विदेश से लौटकर दो-तीन दिन से अस्पताल में है। वह और उसके परिजन चिंतित हैं। बेशक गाइड लाइन व प्रोटोकॉल का पालन अच्छी बात है, लेकिन जीनोम जांच रिपोर्ट जानना भी अभिभावक का अधिकार है।
पूछा, यह भी कोई राष्ट्रीय-रहस्य है क्या?
याची को रिपोर्ट नहीं देने पर हाईकोर्ट ने कहा, ‘हमें समझ नहीं आता कि क्या इसमें कोई राष्ट्रीय-रहस्य छिपा है? सरकार यह तो बताए कि रिपोर्ट कब तक आएगी?’ उन्होंने याची से कहा कि अदालत रिपोर्ट मिलना सुनिश्चित करेगी। इसके लिए सरकार को कुछ समय देना चाहिए।