हाईकोर्ट ने मुफ्त भोजन परियोजना के तहत रैन बसेरों में अक्षय पात्र फाउंडेशन के जरिये गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने के बावजूद भुगतान नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। साथ ही, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की सीईओ गरिमा गुप्ता से जवाब मांगा है और उन्हें अगली सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि संस्था को पैसे का भुगतान न होने से रैनबसेरों में मुफ्त भोजन बंद है। अदालत को बताया गया कि कोविड के दौरान राजधानी में कई बार लॉकडाउन लगाया गया था। ऐसे में राजधानी में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर बेरोजगार हो गए थे और भूखे रहने को मजबूर थे।
इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने तत्काल राहत पहुंचाने के लिए दिल्ली सरकार के रैनबसेरों में रहने वाले बेघरों को मुफ्त भोजन वितरित करने का निर्णय लिया था। दिल्ली सरकार के तहत दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के विभिन्न आश्रयों में रहने वाले सभी बेघरों को गैर सरकारी संगठन अक्षय पात्र फाउंडेशन की ओर से मुफ्त में भोजन दिया जाता है।
इसके लिए दिल्ली सरकार अक्षय पात्र को भुगतान करती है, लेकिन कुछ अफसरों ने मनमानी करते हुए अक्षय पात्र को दिए जाने वाले भुगतान को रोक दिया है। इससे बकाया इतना बढ़ गया है कि रैनबसेरों में खाना देना बंद कर दिया गया। संस्था का सरकार पर 10 करोड़ रुपये बकाया है।
दिल्ली सरकार के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने अक्षय पात्र का भुगतान करने का निर्णय कई हफ्तों पहले दे दिया है, लेकिन मगर सारी कार्यवाही होने और मंत्री के स्पष्ट आदेशों के बावजूद भी कुछ अफसर मनमानी कर भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की सीईओ गरिमा गुप्ता को तलब कर लिया।