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दिल्ली हाईकोर्ट: छोटे अपराधों में किशोरों के खिलाफ जांच समाप्त करने पर कदम न उठाने के लिए सरकार को अदालत की फटकार

Tue, 12 Oct 2021 07:59 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

अदालत ने जेजेबी के रवैये पर भी नाराजगी जताई। कहा कि कार्यपालिका को आदेश का पालन करने में कठिनाई नहीं, लेकिन जेजेबी को आदेश का पालन करने में कठनाई क्यों है। अदालत ने पुलिस से भी कहा कि वो महामारी का बहाना नहीं बना सकती।
 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने किशोर न्याय बोर्डों (जेजेबी) में एक वर्ष से ज्यादा अवधि से लंबित मामलों को खतम करने संबंधी आदेश का पालन न करने पर मंगलवार को दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई। इतना ही नहीं सरकार ने पिछले छह माह से एक वर्ष की अवधि में लंबित मामलों की जानकारी नहीं दी, इस बात के लिए भी अदालत ने नाराजगी जताई।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने हाल ही में दिए फैसले में नाबालिगों के खिलाफ एक वर्ष से ज्यादा अवधि से लंबित जांच वाले मामलों को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का निर्देश दिया था। अदालत ने सभी जेजेबी को इस संबंध में औपचारिक आदेश पारित करने को कहा था। 

इसके अलावा अदालत ने सरकार को छह माह से एक वर्ष तक के लंबित मामलों की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था ताकि इन मामलों को भी खत्म करने पर विचार किया जा सके। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि नियमों में कुछ संशोधन चल रहे हैं और सरकार उसका इंतजार कर रही है। सरकार ने जेजेबी के समक्ष किशोरों को पेश करने के लिए 10 दिन का समय मांगा।
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पीठ ने इस तर्क पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे इंतजार नहीं कर सकते, किशोर इंतजार नहीं कर सकते। आप जितना चाहते हैं उतना समय लें लेकिन बच्चों को होल्ड पर नहीं रखा जा सकता। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने पीठ के समक्ष एक चार्ट पेश किया जिसमें जेजेबी के समक्ष पेश किए गए किशोरों की संख्या में 409 नाबालिगों का अंतर था और उसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

पीठ ने सवाल किया कि ये 409 किशोर कहां हैं? सिस्टम में ये 409 (नाबालिग) खत्म हो जाएंगे। क्या हो रहा है? इनका क्या हुआ और वे कहां हैं? पीठ ने कहा सरकार का आचरण संतोषजनक नहीं है और अदालत के 29 सितंबर के फैसले में कहा गया है कि बच्चे को जेजे एक्ट के तहत 24 घंटे के भीतर जेजेबी के सामने पेश किया जाना चाहिए, स्पष्ट था और इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।

अदालत ने सरकार को अपने पिछले आदेश का पालन करने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर विस्तार से जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान कर दिया। 
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जेजेबी के रवैये पर नाराजगी
पीठ ने जेजेबी के रवैये पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जेजेबी क्या कर रहे हैं, हम इससे आश्चर्यचकित हैं। क्या उन्हें हमारे आदेश की जानकारी नहीं है? उन्हें हमारे आदेश का पालन करना चाहिए। पीठ ने कहा, अब तक जेजेबी को पुलिस को बोर्ड के सामने सभी किशोरों को पेश करने का निर्देश देना चाहिए था। 

पीठ ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि कार्यपालिका को हमारे आदेश का पालन करने में कठिनाई हो रही है लेकिन हम यह नहीं समझ सकते कि जेजेबी को हमारे आदेश का पालन करने में कठनाई क्यों लग रही है। हम इससे आंखें नहीं फेर सकते।

अदालत ने कहा कि अधिकारी 24 घंटे के भीतर जेजेबी के समक्ष किशोरों को पेश न करने के पीछे कोविड महामारी का बहाना नहीं ले सकते। जब महामारी में पुलिसिंग बंद नहीं हुई तो उसे सभी दस्तावेजी कार्य भी करने चाहिए।
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