दिल्ली सरकार ने सोमवार को पंजीकृत 23,256 निर्माण श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की मदद दी। उन्हें बीते साल प्रदूषण के चलते निर्माण कार्य बंद होने के कारण यह मदद दी गई है। यह राशि बीते नवंबर माह में ही आवंटित कर गई थी, लेकिन बैंक खातों में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ निर्माण श्रमिकों को यह राशि मिल नहीं पाई थी। उनके खाते में यह राशि अगले दो दिनों में जमा हो जाएगी। यह राशि उन श्रमिकों में वितरित की गई है, जो 24 नवंबर 2021 तक दिल्ली बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
दिल्ली सरकार ने बीते साल नवंबर माह में वायु प्रदूषण के कारण निर्माण गतिविधियों को बंद कर दिया गया। इस कारण इन श्रमिकों की आजीविका में आई रुकावट के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने हर पंजीकृत निर्माण श्रमिक को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया था। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार निर्माण श्रमिकों के साथ हर कदम पर खड़ी है। निर्माण श्रमिक देश के रीढ़ की हड्डी हैं, जो देश को मजबूत करते हैं। मजदूर खड़े हैं तो हमारी इमारतें खड़ी हैं, शहर खड़े हैं। इसलिए श्रमिकों के सम्मान और उनके हितों का ध्यान रखना हमारी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। जिससे श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हुई थी। दिल्ली सरकार तब भी उनके साथ खड़ी थी और अब भी उनके साथ खड़ी है और हमेशा दिल्ली सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली में करीब 11 लाख निर्माण श्रमिक हैं, जिनमें से नौ लाख श्रमिक बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं।
दिल्ली सरकार ने कोरोना काल में पहले लॉकडाउन के दौरान 118256 श्रमिकों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की थी। सरकार ने 1,18,256 निजर्माण श्रमिकों के खाते में 118 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे, जबकि दूसरे लॉकडाउन के दौरान 3,13,452 श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद दी और 155 करोड़ रुपये उनके खाते में ट्रांसफर किए गए।