टोकन की खरीदारी में आई कमी
डीएमआरसी के अधिकारी के मुताबिक, सेवा के शुरू होने के बाद यात्रियों ने टोकन खरीदना कम कर दिया है। क्यूआर कोड आधारित पेपर टिकटों का इस्तेमाल करने में यात्रियों की तरफ से कुछ एएफसी गेट पर तकनीकी समस्या होने की शिकायतें भी कीं। इसे दुरुस्त करने के बाद ऐसे टिकट की बिक्री में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जून के अंत तक सभी स्टेशनों पर मिलेगी सुविधा
यात्रियों को नेटवर्क पर निर्बाध सफर का मौका देने के लिए डीएमआरसी की ओर से स्मार्ट कार्ड भी जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जून के आखिरी तक पूरे नेटवर्क के सभी स्टेशनों को क्यूआर कोड आधारित टिकट के लिए तैयार कर लिया जाएगा। दिल्ली मेट्रो ने दिसंबर 2002 में रेड लाइन पर छह स्टेशनों के बीच 8.2 किमी के कॉरिडोर पर सफर की शुरुआत की थी। विस्तार के बाद 286 स्टेशनों के साथ नेटवर्क बढ़कर 391 किमी का हो गया है। दिलचस्प यह है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने दिल्ली मेट्रो के पहले कॉरिडोर पर सेवा की शुरुआत की थी। इसके अगले दिन ही यात्रियों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि इसे नियंत्रित करने के लिए पेपर टिकट जारी करना पड़ा।
बंद हो जाएगी टोकन की बिक्री
कोविड-19 महामारी के दौरान यात्रा में सोशल डिस्टेसिंग और संपर्क रहित सेवा के लिहाज से चरणों में टोकन की बिक्री बंद करने की दिशा में पहल की। दिल्ली मेट्रो के टोकन में अंग्रेजी और हिन्दी में ‘दिल्ली मेट्रो’लिखा होने सहित दूसरी तरफ कुतुब मीनार की एक तस्वीर बनी हुई है। इसमें इस्तेमाल की गई चिप विदेश से खरीदी गई है। एक टोकन की कीमत करीब बनाने की लागत करीब 16 रुपये है। उत्पादन एक टोकन की तुलना में क्यूआर-कोड-आधारित पेपर टिकट की कीमत बहुत मामूली है। डीएमआरसी ने 8 मई को जारी एक बयान में कहा कि मेट्रो में टोकन की बिक्री धीरे धीरे खत्म कर दी जाएगी।
जनकपुरी पश्चिम–आर के आश्रम कॉरिडोर पर चार किमी में तैयार हुआ वायाडक्ट
दिल्ली मेट्रो फेज-4 के जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम कॉरिडोर पर मजलिस पार्क से मुकरबा चौक के बीच चार किलोमीटर के दायरे में वायाडक्ट निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। भलस्वा और मजलिस पार्क स्टेशन को जोड़ने वाले इस हिस्से का निर्माण होने के तीन साल के भीतर मेट्रो सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। अब ट्रैक बिछाने सहित दूसरे कार्यों की शुरुआत की जाएगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने बताया कि एलिवेटेड वायाडक्ट तैयार कर ट्रैक बिछाने व ओवरहेड तार लगाने का काम शुरू किया जाएगा। साथ ही, कॉरिडोर के हैदरपुर बादली तक वायाडक्ट की संरचना का निर्माण भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे ट्रैक के ऊपर एक क्रॉसिंग बची होने की वजह से निर्माण में थोड़ी देरी हुई। कॉरिडोर का निर्माण कार्य मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।