अदालत ने दिल्ली दंगों के दौरान आगजनी करने के आरोप से आठ आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध बिना शक साबित करने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता ने न तो आरोपियों की पहचान की है और न ही उनके खिलाफ कोई सीसीटीवी फुटेज है जिससे साबित हो कि वे घटनास्थल पर थे। अदालत ने कहा आरोपियों पर लगी अन्य धाराएं मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष सुनवाई योग्य है ऐेसे में वे मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में स्थानांतरित कर रहे है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपपत्र में भारतीय दंड संहिता की धारा 436 (आग या विस्फोटक पदार्थ से शरारत) की धारा को जोड़ा है लेकिन वह आरोप साबित करने में असफल रहा है।यह मामलों में विभिन्न दुकानदारों द्वारा दायर 12 शिकायतों के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान दंगाइयों द्वारा उनकी दुकानों को कथित रूप से लूट लिया गया था और तोड़फोड़ की गई थी। आरोपियों को उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में उनके द्वारा दिए गए बयान और बीट अधिकारी पुलिस कांस्टेबलों द्वारा पहचान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।
अदालत ने आठ आरोपियों को बरी करते हुए कहा केवल पुलिस कांस्टेबल द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर आईपीसी की धारा 436 लागू नहीं की जा सकती क्योंकि 12 शिकायतकर्ताओं ने अपनी लिखित शिकायतों में इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा था। उन्होंने साक्ष्यों के विशलेषण से पता चलता है कि किसी भी शिकायतकर्ता ने आरोपी व्यक्तियों को दंगाइयों की भीड़ का हिस्सा होने के लिए पहचाना नहीं है, जिन्होंने उनकी दुकानों में तोड़फोड़ की थी। अदालत ने कहा कि पेश फोटो से भी आग या विस्फोटक पदार्थ की कोई घटना सामने नहीं आई है।
अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाते हुए कहा कि एक शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना 25 फरवरी को हुई जबकि अन्य ने दावा किया कि यह घटना 24 फरवरी को हुई थी। वहीं किसी भी स्तंत्रत गवाह ने आरोपियों को घटनास्थल पर नहीं देखा।
अदालत ने कहा आरोपपत्र में आरोपियों पर अन्य धाराएं जैसे धारा 147 (दंगा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी सभा), 457 (घर में जबरन घुसना), 380 (चोरी), 411 (चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) भी लाइर्ग गई है और यह मजिस्ट्रेट अदालत में सुनवाई योग्य है ऐसे में वे मामले को मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष स्थानांतरित कर रहे है।