नई दिल्ली। दिल्ली कैंट इलाके में नौ साल की बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के आरोप में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर याचिका याची ने वापस ले ली है। यह याचिका दिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख और प्रवक्ता नवीन कुमार जिंदल ने दायर की थी।
राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह ने जिंदल द्वारा दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए उन्हें उपयुक्त अदालत के समक्ष नए सिरे से याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ शिकायत वापस लेने की इजाजत प्रदान कर दी।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस ने कहा था कि इसी तरह की अन्य याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है।
अधिवक्ता नीरज के माध्यम से दायर शिकायत में पुलिस को राहुल गांधी के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट व पॉक्सो अधिनियम, आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याची ने आरोप लगाया था कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
शिकायत में कहा गया कि राहुल ने पीड़िता के परिवार के साथ एक तस्वीर साझा की। इसमें उल्लेख किया गया कि वे उसके माता-पिता हैं। तस्वीर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है और इस तस्वीर के आधार पर परिवार की पहचान और दुष्कर्म पीड़िता का आवास विवरण बहुत स्पष्ट है और जो दुष्कर्म पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के बराबर है।
याची ने कहा दुष्कर्म पीड़ितों की पहचान की रक्षा की जानी चाहिए ताकि वे उपहास, उत्पीड़न या सामाजिक बहिष्कार का शिकार न हों। ट्विटर ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने सांसद राहुल गांधी द्वारा कथित रूप से संवेदनशील विवरण सार्वजनिक करने और पीड़िता के परिवार की तस्वीरें प्रकाशित करने वाले ट्वीट को हटा दिया है। कंपनी ने राहुल गांधी के अकाउंट को बंद करने का भी दावा किया क्योंकि इसने उनकी नीति का उल्लंघन किया है।