प्रदर्शन करते भाजपा नेता व कार्यकर्ता
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पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दाम कम नहीं करने को लेकर भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास के समीप विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्र सरकार ने अपने राजस्व में कटौती करके देश और दिल्ली की जनता को राहत दी। पेट्रोल-डीजल के भाव में कमी हुई। लेकिन दिल्ली सरकार वैट कम करने को राजी नहीं है। दिल्ली में पेट्रोल-डीजल पर सबसे ज्यादा वैट वसूला जा रहा है। उधर, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदियाने कहा है कि दूसरे राज्यों की तर्द पर दिल्ली सरकार भी वैट कम करने पर विचार कर रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि पिछले दो सालों से देश बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राजस्व में कमी के साथ-साथ कोरोना से लड़ने के लिए मुफ्त टीका, मुफ्त इलाज और मुफ्त राशन देने का काम केंद्र सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की वजह से दिल्ली की जनता बढ़े हुए दामों पर पेट्रोल-डीजल लेने को मजबूर है। जब तक पेट्रोल-डीजल के दामों पर वैट की कमी की घोषणा केजरीवाल सरकार नहीं कर देती तब तक आम जनता के हित में हमारा संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल, उपाध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा, राजन तिवारी, पूर्वांचल मोर्चा मंत्री एस राहुल व प्रदेश, जिला, मंडल के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
पेट्रोल व डीजल पर दिल्ली सरकार वैट में करे कटौती: बिधूड़ी
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के उस बयान को भी चुनौती दी है जिसमें पेट्रोल-डीजल की महंगाई के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। बिधूड़ी ने कहा कि 2015 में जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी तो पेट्रोल पर 20 फीसदी और डीजल पर 12 फीसदी वैट लिया जाता था। अब भी पेट्रोल पर 30 फीसदी और डीजल पर 16.75 फीसदी वैट वसूला जा रहा है। जोकि पूरे देश में सबसे ज्यादा है।
केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके पेट्रोल की कीमत पर पांच रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की राहत दी है। लिहाजा दिल्ली सरकार भी पेट्रोल पर वैट को 20 फीसदी पर और डीजल पर 12 फीसदी करे। बिधूड़ी ने कहा कि अब वैट कम करके जनता को राहत देने की बजाय आप सरकार झूठ बोलकर भागने की कोशिश कर रही है लेकिन उसे ऐसा नहीं करने दिया जाएगा। दिल्ली सरकार असंवेदनशील है। दिल्ली की जनता का दर्द नहीं दिखता। राजनीति विस्तार में मशगूल है सरकार।