इस आदेश के संबंध में एम्स के नए निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास की एक चिट्ठी सामने आई थी। एम्स निदेशक ने इस चिट्ठी में कहा था कि जिन मरीजों को सांसदों द्वारा अपेक्षित परामर्श या उपचार के लिए एम्स भेजा जाता है, उन्हें उचित सहायता प्रदान की जाए।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब सांसदों को वीआईपी सुविधा नहीं मिलेगी। एम्स प्रशासन ने 19 अक्टूबर को जारी आदेश को वापस लेते हुए सुविधा को पहले की तरह सामान्य बना दिया है। एम्स प्रशासन ने दो दिन पहले ही आदेश जारी कर सांसदों द्वारा भेजे जाने वाले मरीजों को अलग से सुविधा देने का फैसला किया था।
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पुराने फैसले के बाद सांसदों को ओपीडी, इमरजेंसी, एडमिशन व अन्य जगहों पर इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता। इन्हें बेहतर सुविधा देने के लिए 24 घंटे एक नोडल अधिकारी तैनात कर दिया था। एम्स निदेशक डॉक्टर एम श्रीनिवास की तरफ से एक पत्र जारी कर लोकसभा सचिवालय को बताया गया था कि एम्स में सांसदों के लिए वीआईपी व्यवस्था कर दी गई है।
एम्स ने एक डयूटी ऑफिसर को नियुक्त किया है जो इसका नोडल अधिकारी होगा और वह सांसदों के इलाज की सुविधा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होगा। इस आदेश के बाद फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने इसका जमकर विरोध किया था। विरोध को देखते हुए एम्स ने इस आदेश को वापस ले लिया।