कैबिनेट मंत्री कैलाश गहलोत ने दिल्ली परिवहन निगम द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद से जुड़े एक मामले में अब भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार पांडेय ने याची गहलोत के व्यक्तिगत रूप से पेश न होने के आधार पर मामले की सुनवाई एक सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली सरकार में मंत्री एवं याची कैलाश गहलोत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गुप्ता ने उन्हें बदनियती से बदनाम करने के लिए उक्त षड्यंत्र रचा है और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए और राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए शिकायतकर्ता पर मौखिक और साथ ही लिखित रूप में मानहानिकारक, शरारती, झूठे और घिनौने आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने बसों के लिए निविदा जारी की और उचित प्रक्रिया के बाद इसे टाटा के नाम टेंडर जारी किया गया है। गुप्ता को इस तथ्य की पूरी जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इस तरह के आरोप लगाए है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गुप्ता ने शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बेबुनियाद, घृणित और मानहानिकारक बयान और अन्य सामग्री पोस्ट की।
याची ने कहा कि गुप्ता ने दिल्ली के निवासियों को बड़ी राहत देने के लिए दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना को रोकने के लिए अपमानजनक और अपवादजनक आरोप लगाए और एक उच्चस्तरीय समिति से क्लीन चिट के बावजूद मंत्री की विश्वनियता पर संदेह करते हुए ट्वीट पोस्ट किए। दायर मानहानि मामले में याची गहलोत ने कहा कि लो फ्लोर बसों की खरीद मामले में विजेंद्र गुप्ता ने जानबूझ कर उन्हें बदनाम करने और दुर्भावना पूर्ण उद्देश्यों से ऐसे आरोप लगाए है।
उन्होंने कहा कि विजेंद्र गुप्ता ने इस परियोजना में घोटाले का झूठा आरोप लगाया और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और एलजी से संपर्क किया। जिसके बाद उपराज्यपाल ने एक समिति गठित करने के आदेश दिए। गठित समिति द्वारा जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आने पर परिवहन मंत्री को क्लीन चिट दे दी गई थी।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि विजेन्द्र गुप्ता के खिलाफ इस तरह की लापरवाह टिप्पणी करने पर धारा 499, 501 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए क्योंकि उनके रवैये से समाज में उनकी प्रतिष्ठा खराब हुई है।