नई दिल्ली। प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल करने के लिए कथित तौर पर उकसाने के मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री एमएल खट्टर पर प्राथमिकी दर्ज की जाए या नहीं, अदालत ने इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सचिन गुप्ता ने याचिकाकर्ता के तर्क सुनने के बाद कहा कि वे अपना निर्णय दो नवंबर को देंगे। अधिवक्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि तीन अक्तूबर को चंडीगढ़ में अपने आवास पर पार्टी के किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और भाजपा सदस्य का एक विवादास्पद वीडियो रिकॉर्ड किया गया था।
याची ने कहा कि वीडियो में सीएम को पार्टी कार्यकर्ताओं को विरोध करने वाले किसानों के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल करने और उत्तर और पश्चिम हरियाणा के हर जिले में 500- 600-1,000 स्वयंसेवक बनाने और लाठियों से लैस होने व जेल जाने के लिए तैयार रहने के लिए उकसाते हुए देखा गया था। सीएम ने कहा था ऐसा करने से वे बड़े नेता बन जाएंगे।
याचिका में अदालत से खट्टर के खिलाफ धारा 153, 153ए, 505 सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
याचिका में अदालत से खट्टर को तलब करने और उन्हें कानून के अनुसार दंडित करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके जांच करने का निर्देश दिया जाए। याची ने कहा सीएम के बयान से अराजकता फैलने के अलावा कानून व्यवस्था की भी स्थिति खराब होने की संभावना है।