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दिल्ली दंगा : छह आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित

Tue, 04 Jan 2022 11:55 PM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस व बचाव पक्ष के तर्क सुनने के बाद आरोपी ताहिर, शाहरुख, मो. फैजल, मो. शोएब, राशिद और परवेज की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में छह आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। उन पर भीड़ में शामिल होकर दंगा करने, एक मिठाई की दुकान में आग लगाने का आरोप है। इस आगजनी में 22 वर्षीय लड़के दिलबर नेगी की जलने से मौत हो गई थी। वह अनिल स्वीट कार्नर में वेटर का काम करता था।

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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस व बचाव पक्ष के तर्क सुनने के बाद आरोपी ताहिर, शाहरुख, मो. फैजल, मो. शोएब, राशिद और परवेज की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा है।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता अमित महाजन ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क रखा कि जहां दंगे सुबह शुरू हुए और देर रात तक जारी रहे, यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी व्यक्ति दोपहर में दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे, रात के दौरान नहीं।
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उन्होंने कहा इस बात के पूरे साक्ष्य हैं कि आरोपी दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे जो दंगों के लिए जिम्मेदार है। उनके कृत्यके कारण दिलबर नेगी की मौत हो गई। ऐसे में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

महाजन ने कहा कि आरोपियों ने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि वे उस दुकान के सामने वीडियो फुटेज में नहीं देखे गए थे, जो उस समय जलाई गई थी। उन्होंने कहा जो कोई भी भीड़ का हिस्सा था, उसे धारा 149 के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

उन्होंने कहा जब आरोपी 100 अन्य दंगाइयों के साथ शामिल होते हैं और यदि उन कृत्यों के परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाती है तो वे यह नहीं कह सकते कि हमारा इरादा मारना नहीं था।

वहीं बचाव पक्ष ने अपने मुवक्किलों को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि वे हत्या के आरोप में शामिल थे। ऐसे में जमानत स्वीकार की जाए।

इस मामले में थाना गोकलपुरी में धारा 147, 148, 149, 302, 201, 436 और 427 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। जांच के बाद चार जून 2020 को आरोपपत्र दाखिल किया गया।

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