बोर्ड ने इसके अलावा यमुना नदी की सफाई और बाढ़ के मैदान, ट्रैफिक जाम, पार्किंग मुद्दे, शहर के पुराने क्षेत्रों के विकास, औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास मिश्रित उपयोग, स्ट्रीट, वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए शुल्क, किराये और किफायती आवास के प्रावधान, अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी बस्तियों में सुधार, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुविधाएं, वहनीय सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, वेंडिंग गतिविधियां, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मुद्दे, पैदल चलने वालों के लिए सुविधाएं, इलाकों की साफ-सफाई, जल निकासी और सीवरेज सिस्टम, उपयोगिता योजनाओं आदि से संबंधित मामलों पर सुझावों एवं आपत्तियों पर सुनवाई की है।
इसके अलावा बोर्ड ने विरासत, संस्कृति, सार्वजनिक स्थान, लैंड पूलिंग नीति, ट्रांजिट ओरिएंटिड डेवलेपमेंट (पारगमन उन्मुख विकास), हरित विकास क्षेत्र, पुनर्सृजन नीति, योजना निगरानी और रूपरेखा, मिश्रित उपयोग सड़कों, सुविधा बाजार केंद्र और स्थानीय बाजार केंद्र के विकास से संबंधित मुद्दे, औद्योगिक क्षेत्र के पुनर्विकास के मुद्दे, शैक्षणिक संस्थानों के लिए मानदंडों में संशोधन, एफएआर से संबंधित विकास नियंत्रण मानदंड, ऊंचाई, ग्राउंड कवरेज, सड़क की चौड़ाई, पार्किंग मसलों पर भी लोगों के सुझावों पर चर्चा की।
दिव्यांगों को डीडीए से घर लेना पड़ रहा महंगा
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के माध्यम से ऋण पर दिव्यांगों को घर लेना काफी महंगा पड़ रहा है। उन्हें बाहरी एजेंसियों से ऋण लेने की तुलना में डीडीए के माध्यम से ऋण लेने पर पांच प्रतिशत अधिक ब्याज देना पड़ेगा। इसका खुलासा एक आरटीआई के जवाब में हुआ है।
आशीष कुमार शर्मा नामक व्यक्ति ने बताया कि डीडीए की ओर से दिव्यांगों को रियायती दर पर घर उपलब्ध कराने का वादा किया जा रहा है। इतना ही नहीं डीडीए उन्हें किस्तों पर घर की पेशकश कर रहा हैं। इस संबंध में उनकी ओर से लगाई गई एक आरटीआई का डीडीए ने आश्चर्यजनक जवाब आया।
15 प्रतिशत का लग रहा ब्याज
डीडीए ने बताया कि वह 15 प्रतिशत ब्याज की दर पर ऋण उपलब्ध कराते है, जबकि बाहरी एजेंसियां अधिकतम 10 प्रतिशत की दर से ऋण दे रही हैं। उन्होंने खुलासा किया कि डीडीए ने अपने ब्रोशर में इस तथ्य को छुपा रखा हैं। उनका माननना है कि डीडीए के प्रस्तावित 10 लाख के घर के लिए अतिरिक्त राशि की गणना करने पर 15 साल की किश्त पर एक दिव्यांग को बाहरी बैंक से ऋण लेने वाले सामान्य व्यक्ति की तुलना में लगभग 10 से 15 लाख अधिक का भुगतान करना पड़ता है। इस बारे में उन्होंने पीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।