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58 साल पहले बने स्कूल भवन को डीडीए ने अवैध करार दिया

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नई दिल्ली। पश्चिम दिल्ली स्थित नांगलोई सैयद गांव में बने स्कूल भवन को तोड़ने के मामले में डीडीए व उत्तरी दिल्ली नगर निगम आमने-सामने आए हुए हैं। डीडीए ने नगर निगम के स्कूल के भवन को अवैध निर्माण करार देते हुए उसे तोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। स्कूल भवन को तोड़ने के लिए पुलिस बल नहीं मिलने पर वह कार्रवाई को अंजाम नहीं दे सका। वहीं इस मामले में नगर निगम एवं ग्रामीणों ने डीडीए की कार्रवाई को गैर कानूनी करार दिया है।
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नांगलोई सैयद गांव (पश्चिम विहार के मध्य) की पंचायत ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए वर्ष 1963 में गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए खसरा नंबर 134 में स्कूल भवन बनाने के लिए प्रस्ताव पास किया। पंचायत विभाग ने पंचायत के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए खसरा नंबर 134 पर स्कूल भवन बनाने की इजाजत दे दी।
इसके कुछ दिन बाद वर्ष 1963 में ही नगर निगम ने यहां स्कूल भवन बना दिया। वर्ष 1964 में यहां बच्चों ने शिक्षा ग्रहण करनी शुरू कर दी थी। इस बीच राजस्व रिकॉर्ड में इस खसरा नंबर में शिक्षा भवन को लिख दिया गया।
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गांव के निवासी थान सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 1963 में नांगलोई सैयद ग्रामीण गांव था और उसमें पंचायत अस्तित्व में थी। पंचायत को ग्रामसभा भूमि पर मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों को देने के लिए प्रस्ताव पास करने का पूरा अधिकार था। इसके अलावा उनका गांव डीडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। उनका गांव वर्ष 1982 में शहरीकृत घोषित किया गया और तभी गांव डीडीए के अधीन हुआ। लिहाजा स्कूल भवन वाली भूमि पर डीडीए दावा नहीं कर सकता।
उधर डीडीए नेे गत माह स्कूल भवन को तोड़ने का निर्णय लिया और दिल्ली पुलिस को पत्र दिखकर पुलिस बल मांगा, लेकिन नगर निगम की ओर से पत्र व्यवहार के कारण डीडीए को स्कूल भवन तोड़ने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल नहीं मिला। इस कारण स्कूल भवन तोड़ने का मामला लटक गया।
डीडीए ने पुलिस बल मांगने के लिए लिखे पत्र में यहां अवैध निर्माण होने का हवाला दिया है। डीडीए ने इस पत्र की प्रति स्कूल के प्रधानाचार्य को भी भेजी थी। वहीं ग्रामीण, नगर निगम के शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्थानीय पार्षद ने डीडीए के तर्क और उसकी कार्रवाई को गैर कानूनी करार दिया है। उन्होंने डीडीए व पुलिस को पत्र लिखे है।
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