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दिल्ली : राजधानी में भी सरसों के लिए डीएपी खाद की किल्लत, किसान हुए परेशान

Sat, 23 Oct 2021 06:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

सरसों की बुवाई के लिए नहीं मिल रही खाद, गेंहू की बुवाई का समय नजदीक।
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सरसों की खेती... - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बारिश के साथ डीएपी खाद की किल्लत ने भी किसानों को तंग कर रखा है। गांवों में बारिश से आई अघोषित बाढ़ से बचे खेतों में फसलों की उपज बढ़ाने के लिए किसानों को इस वक्त खाद नहीं मिल रही है। ग्रामीण इलाके में खुली खाद बीच की दुकानों पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है। किसानों के साथ दुकानदार भी इससे परेशान हैं। किसान अपने खेतों को उर्वर नहीं पा रहे हैं तो दुकानदारों की आमदनी ठप पड़ी है।

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राजधानी के किसान प्रतिवर्ष अक्तूबर माह की शुरूआत में सरसों की बुवाई करनी शुरू कर देते हैं। 15 अक्तूबर तक हर हाल में सरसों की बुवाई हो जाती है। वजह यह कि इसके बाद एक ओर खेतों में मानसून के दौरान हुई बारिश की नमी नहीं रहती है। वहीं, सरसों की अच्छी पैदावार नहीं होती है। इस बार अच्छी बारिश होने के कारण ऊंचाई वाले समस्त खेतों में सरसों की बुवाई होने की संभावना थी। इससे किसानों ने सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में सरसों की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया था और अधिकतर किसानों ने अपने खेत तैयार कर लिए थे, लेकिन उन्हें सरसों की बुवाई के लिए डीएपी खाद नहीं मिला और वे खाद मिलने का इंतजार करते रहे। 

इस बीच अधिकतर किसानों के खेतों में नमी खत्म हो गई और वे सरसों की बुवाई नहीं कर सके। हालांकि, गत सप्ताह बारिश होने से उनके खेतों में नमी हो गई है और उन्हें सरसों की बुवाई करने का अवसर मिल गया है। मगर उन्हें अब भी खाद नहीं मिल रहा है। उधर, गेंहू की बुवाई का भी समय नजदीक आ गया है। किसान एक नवंबर से गेंहू की बुवाई शुरू कर देते है। राजधानी के अधिकतर किसान गेंहू की बुवाई करते है। इस कारण राजधानी में खाद की मांग काफी बढ़ जाएगी। 
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सोनीपत से लानी पड़ी खाद
अलीपुर के किसान पप्पन सिंह ने बताया कि एक एकड़ में प्याज की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश की वजह से सब बर्बाद हो गई। वहीं, युरिया खाद मिलना भी इस समय संभव नहीं है। खेत में डालने के लिए इसकी बेहद जरूरत थी। थकहारकर इसके लिए हरियाणा के सोनीपत जाना पड़ा। वहां से किसी तरह जुगाड़ करने के बाद युरिया मिल सकी।

बुवाई के लिए खाद अतिआवश्यक
दिचाऊं कलां गांव के किसान प्रदीप शौकीन के अनुसार सरसों और गेंहू की बुवाई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। यह खाद खेतों में डालने पर फसलों की पैदावार अच्छी होती है। वे 20 दिन से सरसों की फसल की बुवाई के लिए डीएपी खाद खरीदने बाजार जा रहे है, लेकिन उन्हें एक भी दुकान पर खाद नहीं मिला।

खाद नहीं मिलने पर बुवाई नहीं कर पाए
मुंढेला खुर्द के किसान जोगेंद्र खर्ब बताते है कि डीएपी खाद नहीं मिलने पर इस बार वे और अन्य किसान सरसों की बुवाई नहीं कर पाए है, जबकि वह खाद लेने के लिए जाते है तो दुकान अगले सप्ताह आने की बात कर रहे है। उन्हें लग रहा है कि उनकी तरह अधिकतर किसानों को खाद के बिना गेंहू की बुवाई नहीं कर पाएंगे। इसका उपज पर असर पड़ेगा।

एक माह से खाद नहीं आ रहा
 नजफगढ़ में खाद बीज की दुकान चला रहे दुकानदार संदीप ने बताया कि उनके पास एक माह से खाद उपलब्ध नहीं है। उनको हर बार तीन-चार दिन बाद खाद आने की सूचना दी जाती है, लेकिन खाद नहीं आ रहा है। इस कारण उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है, जबकि वह इस सीजन का इंतजार कर रहे है। उनको प्रतिवर्ष इस सीजन में अच्छी खासी आमदनी होती थी।

90 हजार रुपये क्विंटन की दर वाला खरीद रखा है बीज
नई दिल्ली। राजधानी के किसानों ने सरसों की अधिक उपज पैदा करने के लिए 90 हजार रुपये क्विंटन के भाव का बीज खरीद रखा है, जबकि बाजार में सरसों नौ हजार रुपये क्विंटन की दर से बिक रही है। रानी खेड़ा के किसान जगबीर सिंह का कहना है कि बीज में समस्त दाने उच्च कोटि के होते है। इस कारण फसल भी अच्छी होने की संभावना रहती है। लिहाजा किसान महंगे भाव वाला बीज खरीदते है।

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