सुरेंद्र और जय किशोर के हैं छोटे-छोटे बच्चे
सुरेंद्र कुमार के भतीजे दीपक ने बताया कि उसके चाचा पिछले करीब 25 साल से दिल्ली के शास्त्री पार्क में रहकर ऑटो चला रहे हैं। सुरेंद्र के तीन अन्य भाई हैं। इसके परिवार में पत्नी मालती देवी के अलावा चार बच्चे खुशबू कुमारी, चंदा कुमारी, अविनाश और गिरिराज कुमार (4) हैं। दो माह पूर्व सुरेंद्र ने कर्जा लेकर हरियाणा के एक अस्पताल में अपने बेटे गिरिराज के दिल का ऑपरेशन करवाया था। सुरेंद्र अभी कर्जा उतार ही रहा था।
सुरेंद्र का भतीजा जय किशोर भी बराबर में अपने परिवार के साथ रहता था। इसके परिवार में पत्नी निर्मला देवी के अलवा दो बच्चे अंश व नव्या हैं। जय किशोर इलाके में ही पर्स बनाने की फैक्टरी चलाता था। शनिवार को वह अपने चाचा के साथ फैक्टरी का माल लेने के लिए निकला था। चाचा ने सवारी छोड़ने के बाद उसे सदर बाजार मार्केट छोड़ने की बात की थी। सुरेंद्र और जय किशोर की मौत के बाद अब परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल है।
वहीं कोमल सिंह परिवार के साथ आगरा में रहता है। पिछले काफी समय से वह बेरोजगार था। एक माह रघुबीर नगर एक रिश्तेदार के पास रुककर तीन दिन पहले वह आगरा गया था। अब उसके रिश्तेदार घमंडीलाल ने उसकी श्रीनिवासपुरी चौकी में कुक की नौकरी लगवाई थी। रिश्तेदार नीरज ने बताया कि कोमल सिंह के परिवार में पत्नी गंगाश्री, तीन बेटी रीता, शिवानी, काजल और एक बेटा प्रशांत है।
दिल्ली घूमने आया था टाटा
फिरोजाबाद में कोमल की बहन सामंती देवी का परिवार रहता है। टाटा उसका ही बेटा था। छठी कक्षा में पढ़ने वाले टाटा ने मामा कोमल से दिल्ली घूमने की बात की। टाटा के परिवार में मां के अलावा भाई मंगल, छोटू बहन गीता व विमलेश है। इसके पिता पंजाब में काम करते थे। दो साल पहले जहरीला पदार्थ खाकर उन्होंने जान दे दी थी। शुक्रवार रात को कोमल अपने भांजे टाटा को लेकर दिल्ली के निकला था। शनिवार को ही पहले दिन कोमल को पुलिस चौकी में जाकर खाना बनाना था।
सुरेंद्र था बेहद मिलनसार, मोर्चरी पहुंचे 100-125 ऑटो चालक
हर सुख-दुख में सुरेंद्र कुमार ऑटो चालकों के साथ खड़ा रहता था। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही करीब 100-125 ऑटो चालक एलएनजेपी अस्पताल की मोर्चरी पहुंच गए। ऑटो चालक सिराज ने बताया कि सुरेंद्र बहुत ही मिलनसार थे। शनिवार को सुबह वह बहुत खुश था। उसने बाकी ऑटो चालकों के साथ चाय की। बाद में वह शाम में मिलने की बात कर चला गया। एक अन्य ऑटो चालक नसीम ने बताया कि सुरेंद्र बृजेश नामक शख्स का किराए पर लेकर ऑटो चला रहा था। कर्जा होने के कारण वह अपना ऑटो नहीं ले पा रहा था। ऑटो चालक अपना कामधंधा छोड़कर दिनभर मोर्चरी पर जुटे रहे।