दमकल विभाग के सब ऑफिसर राजेश कुमार ने बताया कि सुबह उनकी टीम को खबर मिली तो कनॉट प्लेस से उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। ऑटो बुरी तरह कंटेनर के नीचे ट्रैप था। शवों को निकालने के लिए पहले कंटेनर को ऑटो से हटाना जरूरी था। रोड को ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद कंटेनर में बड़े-बड़े हुक व बेल्ट को फंसाकर एक साथ सभी क्रेनों ने मिलकर कंटेनर को हटाया।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ घंटे बाद सबसे पहले कटर से ऑटो की बॉडी को काटकर जय किशोर यादव का शव निकाला गया। इसके कुछ ही देर बाद सुरेंद्र का शव भी निकाल लिया गया। पिछली सीट पर मौजूद कोमल सिंह और उसके भांजे के शव बुरी तरह क्रैश हो चुके थे। उन दोनों के शवों को निकालने के लिए दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीम को अलग तरह के टूल्स का इस्तेमाल करने पड़े। करीब एक घंटे बाद शवों को निकाला गया। इस दौरान मौके पर दमकल की तीन गाड़ियां, चार एंबुलेंस, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा आबदा प्रबंधन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि ट्रक को सीधा कर थाने पहुंचवाया गया। क्राइम सीन से साक्ष्य जुटाने के बाद रिंग रोड को करीब तीन घंटे बाद आम ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। पुलिस घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से हादसे के सही कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
एकदम तीव्र मोड़ पर ट्रैफिक मर्ज होने की वजह से बिगड़ा संतुलन
दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिंग रोड के बाईपास पर आईएसबीटी से आईटीओ की ओर आते समय ट्रैफिक काफी तेज गति से आता है। यहां यह रोड समाप्त होकर पुराने रिंग रोड से मर्ज होता है, जहां तीव मोड़ है। ऐसे में अक्सर वाहन चालक वहां पर गच्चा खा जाते हैं। तेज गति होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ता है और वह हादसे का शिकार होते हैं। शनिवार सुबह हुए हादसे के लिए भी यही कारण माना जा रहा है।
हालांकि कंटेनर-ट्रक के चालक के पकड़े जाने के बाद ही हादसे की सही वजहों का पता चल पाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार सड़क का रख-रखाव रखने वाली एजेंसी को वहां पर गति-अवरोधक लगाने के लिए लिखा गया है, लेकिन उसमें लापरवाही की वजह से लगातार वहां पर हादसे हो रहे हैं।