नई दिल्ली। अदालत ने करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले में आरोपी महिला आरती कालरा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोपी पर विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों को धोखा देने और दुबई भाग जाने का आरोप है। अदालत ने कहा उन पर आरोप गंभीर हैं और एक पैसा भी वापस नहीं मिला है।
आरोपी आरती के पति सनी कालरा, जो धोखाधड़ी के मामले में भी आरोपी है, को 2020 में सीबीआई के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान से भारत वापस भेज दिया गया था।
व्हाइट टाइगर स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड के सनी कालरा, उनकी पत्नी आरती और कई अन्य के खिलाफ सीबीआई ने दिसंबर 2015 में पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र एस राठी के समक्ष सीबीआई ने कहा कि आरती अपने पति सनी कालरा के साथ मेसर्स व्हाइट टाइगर स्टील प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं। इन दोनों के अलावा मामले में तीन लोक सेवकों को कालरा के साथ आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप में नामजद किया गया था। सभी ने मिलकर जाली दस्तावेज के आधार पर ऋण प्राप्त किया था। सीबीआई के अनुसार उन्होंने ऋण वापस नहीं किया और बैंक को नुकसान पहुंचाया।
सीबीआई अधिवक्ता ज्योति सोलंकी ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरती पर गंभीर आरोप हैं। उसने पति के साथ मिलकर बैंक से 2012 में 10 करोड़ रुपये का ऋण लिया। इस मामले में बैंक अधिकारी भी लिप्त हैं।
आरोपी की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप राणा ने कहा कि उनकी मुवक्किला भारत वापस आने को तैयार है। मामले में बिना अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के आरोपपत्र दायर हो चुका है। ऐसे में उसकी जमानत स्वीकार की जाए।
अदालत ने कहा कि आरोपियों ने पैसे की हेराफेरी की और देेेश से भाग गए। उस पर आरोप गंभीर हैं, करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई और एक पैसा भी वापस नहीं मिला। आरोपी की पहले भी जमानत खारिज हो चुकी है। उसके बाद से परिस्थितियों में कोई अंतर नहीं आया। ऐसे में जमानत देने का आधार नहीं है।