नई दिल्ली। अदालत ने अपनी मुस्लिम पत्नी से सामूहिक दुष्कर्म व उसे तीन तलाक देने के मामले में आरोपी को पीड़िता के बयानों को संदेह के दायरे में लेते हुए जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य आरोप के बावजूद कथित पीड़िता के लगातार आरोपी के घर जाने से संदेह पैदा होता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंदर कुमार ने कहा कि आरोपी तनवीर पर लगे आरोपों के सभी विवादित तथ्यों को जांच के माध्यम से स्पष्ट करना होगा। यह विवाद कथित तौर पर तब पैदा हुआ जब आरोपी ने शिकायतकर्ता को मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम, 2019 की धारा 4 का उल्लंघन करते हुए तलाक दे दिया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने तलाक देने के बाद दुष्कर्म किया और अपने दोस्त नसीम को इसी तरह की हरकत करने की अनुमति दी।
अदालत ने कहा यह तथ्य सामने आया है कि शिकायतकर्ता गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी के घर जाती रही है जिसने मामले में संदेह बढ़ा दिया। अदालत ने कहा शिकायतकर्ता ने आरोपी पर गंभीर आरोप के बावजूद उसके घर जाने का कारण तक नहीं बताया। इसके अलावा यह तथ्य भी सामने आया है कि कथित घटना के समय नसीम और आरोपी दोनों अलग-अलग स्थानों पर थे। वहीं पीड़िता व आरोपी के परिवार के बीच हुई वार्ता की टेप से भी स्पष्ट है कि उसने मामला वकील के कहने पर दर्ज करवाया है।
वहीं आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने न तो अपनी पत्नी को तलाक दिया है और न ही दुष्कर्म किया। उसने कहा कि उसकी पत्नी ने झूठी कहानी बनाई व मामले को सामूहिक दुष्कर्म का रूप दे दिया।
सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। वहीं, जांच अधिकारी भी शिकायतकर्ता से सहयोग नहीं कर रहा बल्कि नियमित रूप से आरोपी और उसके परिवार के संपर्क में है। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि सह आरोपी नसीम का शिकायतकर्ता के वकील से व्यक्तिगत मनमुटाव था। उसने नसीम व उसके परिवार के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए थे।